Bhagat Singh

भगत सिंह

Bhagat Singh

Indian revolutionary (1907–1931)

भगत सिंह: एक क्रांतिकारी की कहानी

भगत सिंह (28 सितंबर 1907 - 23 मार्च 1931), एक भारतीय क्रांतिकारी थे जिन्होंने ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके जीवन और कार्यों ने भारत में स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को गहराई से प्रभावित किया।

1928 का घटनाक्रम:

  • भगत सिंह, हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) के सदस्य थे, जिसका उद्देश्य ब्रिटिश शासन के खिलाफ क्रांति लाना था।
  • दिसंबर 1928 में, भगत सिंह और उनके साथी शिवराम राजगुरु ने लाहौर (आज पाकिस्तान में) में एक ब्रिटिश पुलिस अधिकारी, जॉन सॉन्डर्स की हत्या कर दी।
  • वे सॉन्डर्स को ब्रिटिश पुलिस अधीक्षक जेम्स स्कॉट समझते थे, जिसके आदेश पर एक लाठी चार्ज में भारतीय राष्ट्रवादी नेता लाला लाजपत राय को गंभीर चोटें आई थीं, जिससे कुछ हफ़्ते बाद राय की मृत्यु हो गई थी।
  • सॉन्डर्स एक पुलिस स्टेशन से मोटरसाइकिल पर निकलते समय, राजगुरु ने उन्हें गोलियों से मार गिराया।
  • फिर भगत सिंह ने सॉन्डर्स पर कई गोलियाँ चलाईं, जिसके परिणामस्वरूप सॉन्डर्स की मौत हो गई।

अगली कार्रवाई:

  • भगत सिंह और उनके साथियों ने अपने कार्यों की ज़िम्मेदारी लेते हुए, सार्वजनिक रूप से पोस्टर लगाए और अपना नाम घोषित किया।
  • इसके बाद, भगत सिंह भूमिगत हो गए और कई महीनों तक छिपे रहे।
  • अप्रैल 1929 में, भगत सिंह और उनके साथी बटुकेश्वर दत्त ने दिल्ली में केंद्रीय विधानसभा में दो कम-शक्ति वाले बम फेंके।
  • उन्होंने विधानसभा के सदस्यों पर पर्चे बरसाए और नारे लगाए, जिसके बाद वे गिरफ्तार हो गए।
  • इस गिरफ्तारी के बाद, भगत सिंह को जॉन सॉन्डर्स की हत्या के मामले में भी शामिल किया गया।

जेल में संघर्ष:

  • जेल में, भगत सिंह ने बेहतर जेल स्थितियों की माँग को लेकर जेल में ही भूख हड़ताल की।
  • उनकी हड़ताल के दौरान, उनके साथी जतिन दास की भूख हड़ताल के कारण मृत्यु हो गई।
  • इन सभी घटनाओं ने भगत सिंह को पूरे भारत में एक लोकप्रिय क्रांतिकारी और राष्ट्रीय नायक बना दिया।

फांसी और विरासत:

  • भगत सिंह को जॉन सॉन्डर्स और चन्नन सिंह की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया और मार्च 1931 में उन्हें फांसी दे दी गई।
  • उनकी मृत्यु के बाद, भगत सिंह एक लोकप्रिय लोक नायक बन गए।
  • उनकी विचारधारा, जिसमें समाजवाद और अराजकतावाद शामिल थे, ने भारत में कई लोगों को प्रभावित किया, जिसमें कम्युनिस्ट और दक्षिणपंथी हिंदू राष्ट्रवादी भी शामिल थे।

भगत सिंह को आज भी भारत में एक महान क्रांतिकारी और शहीद के रूप में याद किया जाता है। उनकी जीवन कहानी और विचारधारा भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को समझने के लिए महत्वपूर्ण हैं।


Bhagat Singh was an Indian anti-colonial revolutionary, who participated in the mistaken murder of a junior British police officer in December 1928 in what was to be retaliation for the death of an Indian nationalist. He later took part in a largely symbolic bombing of the Central Legislative Assembly in Delhi and a hunger strike in jail, which—on the back of sympathetic coverage in Indian-owned newspapers—turned him into a household name in the Punjab region, and after his execution at age 23 into a martyr and folk hero in Northern India. Borrowing ideas from Bolshevism and anarchism, the charismatic Singh electrified a growing militancy in India in the 1930s, and prompted urgent introspection within the Indian National Congress's nonviolent but eventually successful campaign for India's independence.