
निर्ऋति: मृत्यु, क्षय और दुःख की देवी निर्ऋति (Sanskrit: निर्ऋति, romanized: Nirṛti) एक हिंदू देवता है, जो मृत्यु, क्षय और दुःख का प्रतीक है। प्रारंभिक हिंदू शास्त्रों में, निर्ऋति एक देवी है जो मृतकों के राज्य में रहती है। वह अंधेरे, बीमारी, दुर्भाग्य और विनाश से जुड़ी है। वह अक्सर काले रंग और भ…

मित्र और वरुण: ऋग्वेद के दो महान देवता प्राचीन भारतीय ग्रंथ ऋग्वेद में मित्र और वरुण (संस्कृत: <span title="International Alphabet of Sanskrit transliteration"><i lang="sa-Latn">mitrā́váruṇā</i></span>) दो देवता हैं जिनका बार-बार उल्लेख किया गया है। दोनों को आदित्य माना जाता है, यानी सूर्य से जुड़…

मार्तंड: सूर्य देवता का आठवाँ और अंतिम रूप हिंदू धर्म में, मार्तंड (संस्कृत: मार्तंड, रोमन लिपि: Mārtanda) आठ सूर्य देवताओं में से आठवाँ और अंतिम देवता है जिन्हें आदित्य कहा जाता है। वे आदित्य कहलाते हैं क्योंकि वे अदिति की संतान हैं। मार्तंड को सूर्य देवता के रूप में भी जाना जाता है और उनकी पूजा…

* चन्दनकी चुटकी भली, गाड़ी भलौ न काठ। बुद्धिवान एकहि भलौ, मूरख भलौ न साठ॥ वर्तमान वोट-प्रणालीके अनुसार जिसकी संख्या अधिक होती है, वह जीत जाता है और राज्य करता है और जिसकी संख्या कम होती है, वह हार जाता है। विचार करें, समाजमें विद्वानोंकी संख्या अधिक होती है या मूर्खोंकी? सज्जनोंकी संख्या अधिक होती है या दुष्टोंकी? ईमानदारोंकी संख्या अधिक होती है या बेईमानोंकी? अध्यापकोंकी संख्या अधिक होती है या विद्यार्थियोंकी? जिनकी संख्या अधिक होगी, वे ही वोटोंसे जीतेंगे और देशपर शासन करेंगे, फिर देशकी क्या दशा होगी—विचार करें!

मणिभद्र: एक प्रमुख यक्ष <p class="mw-empty-elt"> </p> मणिभद्र (संस्कृत: 'मणि' + 'भद्र' = 'रत्न की तरह श्रेष्ठ') एक प्रमुख यक्ष हैं। प्राचीन भारत में, वह एक लोकप्रिय देवता थे। मणिभद्र की उत्पत्ति हिंदू धर्म की प्राचीन यक्षों की परंपरा से हुई है। वे प्राकृतिक शक्तियों और प्रकृति के प्राणियों के सा…

हिंदू धर्म में धरा और धारा हिंदू धर्म में, धरा (संस्कृत: धरा; अर्थ: सहारा) वसुओं में से एक है, जो भौतिक ब्रह्मांड के देवता हैं। वे पृथ्वी और पृथ्वी तत्व का प्रतिनिधित्व करते हैं, हालाँकि पृथ्वी को आमतौर पर देवी पृथ्वी माना जाता है, न कि देवता। धरा (संस्कृत: धारा) एक संस्कृत शब्द है जिसका उपयोग नद…
Main Pardesi Hoon Pehli Baar Aaya hoon | मैं परदेसी हूँ पहली बार आया हु फुल सांग New Song Main Pardesi Hoon Pehli Baar Aaya hoon | Vaishno Devi Yatra Bhajan vaishnodeviyatra mainpardesihoonpehlibaaraayahoon indianvillagetraveling vaishnodevi श्री माता वैष्णो देवी संपूर्ण कथा | Paawan Hai Sabse Oonch…

वाग् देवी: दिव्य वाणी का रूप वाग् (संस्कृत: <span lang="sa">वाच्</span>, <i lang="sa-Latn">vāc</i>) एक वैदिक देवी हैं जो दिव्य वाणी का रूप हैं। वे प्रेरित कवियों और दूरदर्शी लोगों में प्रवेश करती हैं, उनसे प्यार करने वालों को अभिव्यक्ति और ऊर्जा देती हैं; उन्हें "वेदों की माता" और प्रजापति की पत्नी…

वास्तवमें वोट देनेका, सरकार चुननेका अधिकार केवल उन्हीं पुरुषोंको है, जो सच्चे समाजसेवक, त्यागी, धर्मात्मा, सदाचारी, परोपकारी हैं। उनमें भी विशेष अधिकार जीवन्मुक्त, तत्त्वज्ञ महापुरुषोंको है। माँ कोई कार्य करती है तो बालककी सलाह नहीं लेती; क्योंकि बालक मूर्ख (बेसमझ) होता है। परन्तु वोट देनेकी वर्तमान प्रणालीके अनुसार यदि बुद्धिमानोंकी संख्या निन्यानबे है और मूर्खोंकी संख्या सौ है तो एक वोट अधिक होनेसे मूर्ख जीत जायँगे, बुद्धिमान् हार जायँगे, जब कि वास्तवमें सौ मूर्ख मिलकर भी एक बुद्धिमान्की बराबरी नहीं कर सकते*।

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हिंदू धर्म में दक्ष प्रजापति: विस्तृत विवरण हिंदू धर्म में, दक्ष एक प्रजापति हैं और सृष्टिकर्ता ब्रह्मा के पुत्र हैं। हिंदू साहित्य में दक्ष की पत्नी के रूप में असीकिनी और प्रसूति दोनों नामों का उल्लेख मिलता है। दक्ष की कुछ प्रसिद्ध पुत्रियाँ हैं: अदिति: आदित्य देवताओं की माता दिति: दैत्यों की म…

वर्तमान राजनीति संघर्ष पैदा करनेवाली है। हमें वोट दो, दूसरी पार्टीको वोट मत दो, वह ठीक नहीं है—इससे संघर्ष पैदा होता है। वोट-प्रणालीमें मूर्खताकी प्रधानता है। जिस समाजमें मूर्खोंकी प्रधानता होती है, वहीं वोट-प्रणाली लागू की जाती है। महात्मा गाँधीका भी एक वोट और भेड़ चरानेवालेका भी एक वोट! सज्जन पुरुषका भी एक वोट और दुष्ट पुरुषका भी एक वोट! यह समानता मूर्खोंमें ही होती है। ‘अँधेर नगरी चौपट राजा, टके सेर भाजी टके सेर खाजा।’ वोट-प्रणालीमें भी बेईमानी होती है। जिनके हाथमें सत्ता होती है, वे वोट-प्रणालीका खूब दुरुपयोग करते हैं। वोट प्राप्त करनेके लिये विधर्मियोंका पक्ष लेते हैं, समाजकण्टकोंका पक्ष लेते हैं, अपराधियोंका सहारा लेते हैं। ये बातें किसीसे छिपी नहीं हैं।

आपने जो टेक्स्ट दिया है वह विकिपीडिया पेज से एक हिस्सा है जो विस्तृत रूप से बताता है कि पेज को कैसे संसाधित किया गया है। यह जानकारी तकनीकी है और सामान्य उपयोगकर्ता के लिए उतना महत्वपूर्ण नहीं है। आप मुझे और जानकारी दें ताकि मैं आपको हिंदी में विस्तृत जानकारी दे सकूं. उदाहरण के लिए, आप मुझसे पूछ स…
Alka Yagnik - Sarva Mangal Mangalye | Durga Mantra | Durga Maa Songs Sing-Along Divine Devi Mantra "Sarva Mangal Mangalye With Lyrics (सर्व मंगल मांगल्ये)", beautifully sung by Alka Yagnik. May Mata shower Her blessings on you. To receive song updates, subscribe us to link. http://bit.ly/Bhakt…

यथा मधु समादत्ते रक्षन् पुष्पाणि षट्पद:। तद्वदर्थान्मनुष्येभ्य आदद्यादविहिंसया॥ (महा० उद्योग० ३४। १७) ‘जैसे भौंरा फूलोंकी रक्षा करता हुआ ही उनके मधुको ग्रहण करता है, उसी प्रकार राजा भी प्रजाको कष्ट दिये बिना ही उनसे धन (कर) ग्रहण करे।’ परन्तु आज सरकार धनियोंका धन छीननेके लिये उनके घरों और दूकानोंमें छापा मारती है, जो कि डाका डालना ही है, और धनीलोग टैक्ससे बचनेके लिये तरह-तरहकी बेईमानी सीखते हैं। दोनों ही देशका हित नहीं सोचते कि इस नीतिसे भविष्यमें देशकी क्या दशा होगी? सरकार धनियोंसे जबर्दस्ती धन लेनेकी चेष्टा करेगी तो धनियोंके भीतर भी जबर्दस्ती धन छिपानेका भाव पैदा होगा। इसलिये सरकारको चाहिये कि वह धनियोंका धन न छीनकर उनके भीतर उदारताका, परोपकारका भाव जाग्रत् करे। यह भाव वीतराग पुरुषोंके द्वारा ही जाग्रत् किया जा सकता है।

प्रजानामेव भूत्यर्थं स ताभ्यो बलिमग्रहीत्। सहस्रगुणमुत्स्रष्टुमादत्ते हि रसं रवि:॥ (रघुवंश १। १८) ‘वे राजालोग अपनी प्रजाके हितके लिये प्रजासे उसी प्रकार कर लिया करते थे, जिस प्रकार सहस्रगुना करके बरसानेके लिये ही सूर्य पृथ्वीसे जल लिया करता है।’ जब राजाओंमें स्वार्थभाव आ गया और वे प्रजाकी सम्पत्तिका खुद उपभोग करने लगे, तब उनका परम्परासे अरबों वर्षोंसे चला आया राज्य भी नहीं रहा। आज झूठ-कपट आदिके बलपर जीतकर आये हुए नेतालोग सोचते हैं कि हमें तो पाँच वर्षोंतक कुर्सीपर रहना है, आगेका कोई भरोसा नहीं; अत: जितना संग्रह करके लाभ उठा सकें, उतना उठा लें, देश चाहे दरिद्र हो जाय। वे यह सोचकर नीति-निर्धारण करते हैं कि धनियोंका धन कैसे नष्ट हो? यह नहीं सोचते कि सब-के-सब धनी कैसे हो जायँ? महाभारतमें आया है—