विश्व कछुआ
Giant turtle supporting or containing the world
विश्व कछुआ: एक प्राचीन मिथक
"विश्व कछुआ", जिसे "ब्रह्मांडीय कछुआ" या "विश्व-धारण कछुआ" भी कहा जाता है, एक ऐसा मिथक है जो एक विशाल कछुए (या कछुए) को दुनिया को सहारा देने या उसमें रखने के रूप में दर्शाता है। यह मिथक हिंदू पौराणिक कथाओं, चीनी पौराणिक कथाओं और अमेरिका के कुछ आदिवासी लोगों की पौराणिक कथाओं में पाया जाता है।
हिंदू पौराणिक कथाओं में, धरती को एक विशाल कछुए, कुर्म पर टिका हुआ बताया गया है। कुर्म, जिसे ब्रह्मांड का पहला प्राणी माना जाता है, समुद्र में तैरता है और धरती को अपने कवच पर धारण करता है।
चीनी पौराणिक कथाओं में, बाई सुई नामक एक विशाल कछुआ दुनिया को अपने कवच पर रखता है। बाई सुई, जिसे अक्सर "अष्ट सिद्धों" के एक भाग के रूप में चित्रित किया जाता है, एक ज्ञानी और दयालु प्राणी है।
अमेरिकी आदिवासियों की पौराणिक कथाओं में भी इसी तरह के मिथक पाए जाते हैं। उदाहरण के लिए, इरोक्वॉय जनजाति की पौराणिक कथाओं में, दुनिया को एक विशाल कछुए पर टिका हुआ दिखाया जाता है जिसने पृथ्वी को समुद्र के नीचे से ऊपर लाया था।
एडवर्ड बर्नेट टायलर (1878:341) ने अपनी तुलनात्मक पौराणिक कथाओं में "विश्व-कछुए" और उसके समकक्ष "विश्व-हाथी" की चर्चा की है।
यह मिथक दुनिया के समर्थन और स्थिरता को दर्शाता है। यह एक प्राचीन मान्यता को व्यक्त करता है कि दुनिया एक विशाल प्राणी के कंधों पर टिकी है, जो उसके संरक्षण और स्थायित्व का प्रतीक है।