Hith Harivansh Mahaprabhu
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हित हरिवंश महाप्रभु

Hith Harivansh Mahaprabhu

Vrindavan saint, poet, founder of Radha Vallabh Sampradaya

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महाप्रभु श्री हित हरिवंश गोस्वामी: एक विस्तृत विवरण (हिंदी में)

महाप्रभु श्री हित हरिवंश गोस्वामी (१४७३ - १५५२ ईस्वी) एक महान कृष्ण भक्त कवि और संत थे। उन्हें राधा वल्लभ सम्प्रदाय का संस्थापक माना जाता है। उन्होंने अपनी रचनाएँ मुख्यतः ब्रज भाषा में कीं। उनकी सबसे प्रसिद्ध रचना हित चौरासी है, जो भक्ति गीतों का एक अद्भुत संग्रह है।

जन्म और प्रारंभिक जीवन:

हित हरिवंश गोस्वामी का जन्म वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को बाद ग्राम (वर्तमान में मथुरा के पास स्थित बाद) में हुआ था। उनके अनुयायी उन्हें भगवान श्रीकृष्ण का अवतार और उनकी बांसुरी का स्वरूप मानते हैं।

राधा वल्लभ सम्प्रदाय:

हित हरिवंश गोस्वामी प्रेम भक्ति के प्रबल समर्थक थे। उन्होंने राधारानी को परम शक्ति के रूप में स्वीकार किया और राधा-कृष्ण के प्रेम को ही सर्वोपरि माना। उन्होंने राधा वल्लभ सम्प्रदाय की स्थापना की, जिसके केंद्र में राधा-कृष्ण के प्रति निष्काम प्रेम और समर्पण भाव है।

गुरु और शिष्य:

हित हरिवंश गोस्वामी जयमल राठौर के गुरु थे, जो मेड़ता रियासत के शासक और मीराबाई के भाई थे। उन्होंने जयमल राठौर को राधा-कृष्ण भक्ति का मार्ग दिखाया और उनके ह्रदय में प्रेम और भक्ति का दीपक प्रज्वलित किया।

कृतियाँ:

हित हरिवंश गोस्वामी ने अनेक ग्रंथों की रचना की, जिनमें हित चौरासी सर्वाधिक प्रसिद्ध है। इसके अतिरिक्त उन्होंने राधा सुधानिधि, गुरु भक्ति विलास, और हित जुक्ति जैसी रचनाएँ भी कीं।

महत्त्व:

महाप्रभु श्री हित हरिवंश गोस्वामी एक महान संत और कवि थे, जिन्होंने अपने जीवन और साहित्य के माध्यम से राधा-कृष्ण प्रेम का अद्भुत संदेश दिया। उनकी रचनाएँ आज भी भक्तों के हृदय को छू जाती हैं और उन्हें भक्ति के पथ पर अग्रसर करती हैं।


Born in Baad Graam (modern day Bad near Mathura on 11th Day of the Hindu month of Vaishakh. He is considered as the incarnation of Lord Krishna and Krishna's flute by the followers. A follower of Prema Bhakti and devotee of Radharani as the ultimate Supreme Power. He was the Guru of Jaimal Rathore, ruler of Martha State and brother of Mirabai.