अंतर्राष्ट्रीय कृष्ण भावनामृत संघ
Religious organisation
इस्कॉन: कृष्ण चेतना के लिए अंतर्राष्ट्रीय समाज
इस्कॉन, जिसे हरे कृष्णा आंदोलन के नाम से भी जाना जाता है, एक गौड़ीय वैष्णव हिंदू धार्मिक संगठन है। इसकी स्थापना 13 जुलाई 1966 को न्यूयॉर्क शहर में ए. सी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद ने की थी। इसका मुख्य मुख्यालय भारत के पश्चिम बंगाल के मायापुर में स्थित है।
यह संगठन एकेश्वरवाद का अनूठा रूप प्रस्तुत करता है जिसकी नींव हिंदू धर्मग्रंथों पर आधारित है, खासकर भगवद् गीता और भागवत पुराण पर प्रभुपाद जी की टिप्पणियाँ और अनुवाद।
इस्कॉन, गौड़ीय वैष्णव परंपरा की "सबसे बड़ी और यकीनन सबसे महत्वपूर्ण शाखा" है, जिसके अनुयायी 16 वीं शताब्दी की शुरुआत से ही भारत में और 1900 के दशक की शुरुआत से अमेरिका और यूरोप में हैं। दुनिया भर में इसके लगभग 10 मिलियन अनुयायी हैं।
यह धार्मिक संगठन शाकाहार का पालन करता है और शुरू में भक्ति योग के अभ्यास को फैलाने के लिए बनाया गया था। इसके अनुयायी, जिन्हें भक्त कहा जाता है, अपने विचारों और कार्यों को कृष्ण को प्रसन्न करने के लिए समर्पित करते हैं, जिन्हें वे ईश्वर के सर्वोच्च व्यक्तित्व मानते हैं।
सदस्यता के मामले में इसका सबसे तेजी से विस्तार भारत में और (सोवियत संघ के पतन के बाद) रूस और पूर्वी यूरोप के अन्य सोवियत-गठबंधन वाले राज्यों में हुआ है।
यहाँ कुछ और विस्तृत जानकारी दी गई है:
- भक्ति योग: भक्ति योग, हिंदू धर्म के चार मुख्य योगों में से एक है, जिसमें भगवान के प्रति प्रेम और समर्पण के माध्यम से मोक्ष प्राप्ति का मार्ग बताया गया है। इस्कॉन में, भक्ति योग का अभ्यास मुख्य रूप से हरे कृष्णा महामंत्र के जप, कृष्ण की मूर्तियों की पूजा और कृष्ण-कथा श्रवण के माध्यम से किया जाता है।
- शाकाहार: इस्कॉन सभी जीवों के प्रति अहिंसा के सिद्धांत में विश्वास करता है और इसलिए मांस, मछली और अंडे के सेवन का विरोध करता है।
- संगठनात्मक संरचना: इस्कॉन एक गुरु-शिष्य परंपरा पर आधारित है जहाँ गुरु शिष्य को आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। इस्कॉन मंदिरों का नेतृत्व साधु और साध्वी करते हैं जो आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं और अपना जीवन कृष्ण भक्ति और प्रचार में समर्पित करते हैं।
इस्कॉन ने अपनी स्थापना के बाद से ही आलोचनाओं का भी सामना किया है। कुछ आलोचकों ने इस्कॉन पर कट्टरपंथी होने, धन का दुरुपयोग करने और अपने सदस्यों का शोषण करने का आरोप लगाया है। हालाँकि, इस्कॉन ने हमेशा इन आरोपों का खंडन किया है और दावा किया है कि वे भक्ति योग के वास्तविक सिद्धांतों का पालन करते हैं।