जगन्नाथ दास (कन्नड़ कवि)
Indian saint-poet
जगन्नाथ दास: कन्नड़ भाषा के एक महान हरिदास
जगन्नाथ दास (1728-1809) कर्नाटक राज्य के रायचूर जिले के मानवी शहर के रहने वाले थे। वे मध्वाचार्य की शिक्षा परंपरा के अनुयायी थे और कन्नड़ भाषा के प्रमुख हरिदासों में से एक माने जाते हैं। मध्वाचार्य की द्वैत वेदान्त दर्शन के अनुसार, वे "विष्णु के भक्त" (हरिदास) थे।
जगन्नाथ दास, श्री वरदेंद्र तीर्थ के शिष्य थे, जो राघवेन्द्र मठ (मंत्रालयम) के एक प्रसिद्ध संत थे।
जगन्नाथ दास ने कई प्रसिद्ध भक्ति गीत लिखे जो द्वैत वेदान्त के वैष्णव भक्ति (श्रद्धा) को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने मूल शटपदी (छह पंक्तियों वाला पद) छंद में "हरिकथामृतसार" और मूल त्रिपदी (तीन पंक्तियों वाला पद) छंद में "तत्व सुवाली" लिखी।
"श्री हरिकथामृतसार" को लिखने के पीछे उनकी प्रेरणा श्री वरदेंद्र तीर्थ थे।
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