Mukundraj
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मुकुन्दराज

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मुकुंदराज: एक प्रारंभिक मराठी संत कवि

मुकुंदराज मराठी साहित्य के एक अग्रणी कवि थे। पहले कुछ विद्वान उन्हें १२वीं शताब्दी का मानते थे, लेकिन अब यह मान्यता है कि वे १२वीं शताब्दी या उसके बाद के रहे होंगे।

मुकुंदराज के जन्मस्थान और निवास स्थान को लेकर विद्वानों में एकमत नहीं है। संभवतः उनका जन्म भंडारा जिले के पाउनी में हुआ था। महाराष्ट्र के बीड जिले के अंबाजोगाई में मुकुंदराज की समाधि है।

मुकुंदराज नाथ संप्रदाय के अनुयायी थे और आदि शंकराचार्य के अद्वैत दर्शन के प्रति समर्पित थे। उन्होंने विवेकसिंधु और परममृत नामक दो धार्मिक ग्रंथों की रचना की। पूर्व के कुछ विद्वान विवेकसिंधु को ११८८ ईस्वी का मानते थे और इसे मराठी भाषा का पहला साहित्यिक ग्रंथ मानते थे।

हालांकि, अब यह माना जाता है कि विवेकसिंधु की रचना लीलाचरित्र और ज्ञानेश्वरी जैसे अन्य मराठी ग्रंथों के बाद हुई होगी।

यहाँ कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं को और विस्तार से समझाया गया है:

  • मुकुंदराज का काल: पहले १२वीं शताब्दी माना जाता था, लेकिन अब १२वीं शताब्दी या उसके बाद के काल को अधिक मान्यता प्राप्त है।
  • जन्मस्थान: पाउनी (भंडारा जिला) को जन्मस्थान माना जाता है, लेकिन यह निश्चित नहीं है।
  • समाधि: अंबाजोगाई (बीड जिला) में स्थित है।
  • धार्मिक आस्था: नाथ संप्रदाय के अनुयायी और अद्वैत दर्शन में विश्वास रखते थे।
  • रचनाएँ: विवेकसिंधु और परममृत
  • महत्व: मराठी साहित्य के प्रारंभिक कवियों में से एक।

Mukundraj was one of the earliest Marathi literary figures poet. Some earlier scholars dated him to the 12th century.