नाग पंचमी
Hindu festival honouring serpents
नाग पंचमी : सर्पों की पूजा का दिन (नागों की पूजा का दिन)
नाग पंचमी, एक महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार है जो भारत, नेपाल और अन्य हिंदू बहुल देशों में मनाया जाता है। इस दिन, नागों या सर्पों की पूजा की जाती है। यह त्यौहार श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है, जो आमतौर पर जुलाई या अगस्त में आता है। हालांकि, कर्नाटक, राजस्थान और गुजरात जैसे कुछ राज्यों में, नाग पंचमी श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है।
पूजा विधि:
इस दिन, लोग नाग देवता की मूर्ति या चित्र की पूजा करते हैं। यह मूर्ति चांदी, पत्थर, लकड़ी या कपड़े पर बनी हो सकती है। नाग देवता को दूध से स्नान कराया जाता है और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए उनका आशीर्वाद लिया जाता है। कई जगहों पर, विशेष रूप से सपेरों द्वारा, जीवित सांपों, खासकर कोबरा की पूजा की जाती है और उन्हें दूध चढ़ाया जाता है।
पौराणिक महत्व:
महाभारत में, ऋषि आस्तीक ने राजा जनमेजय को सर्प यज्ञ करने से रोक दिया था। राजा जनमेजय अपने पिता परीक्षित की मृत्यु का बदला लेने के लिए यह यज्ञ कर रहे थे, जिन्हें तक्षक नाग ने डसा था। यह यज्ञ श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को रोक दिया गया था। उसी दिन से नाग पंचमी मनाई जाती है। इसी यज्ञ के दौरान, वेद व्यास जी ने पहली बार महाभारत का वाचन किया था।
नाग पंचमी का महत्व:
नाग पंचमी नागों के प्रति सम्मान और श्रद्धा व्यक्त करने का दिन है। नागों को प्रकृति का रक्षक माना जाता है और उनका संबंध वर्षा और उर्वरता से भी है। यह त्यौहार हमें प्रकृति के प्रति संवेदनशील होने और सभी जीवों के प्रति दया भाव रखने का संदेश देता है।