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अमृतेश्वर मंदिर, अमृतपुरा
Amrutesvara Temple, Amruthapura
Temple in Karnataka, India
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व्याली: रीति-रिवाजों की रक्षक देवी
व्याली एक हिंदू देवी हैं जिन्हें अनुष्ठानों और धार्मिक क्रियाओं को करने वाले स्थानों की रक्षा करने की शक्ति होने का मानना है। उन्हें अक्सर एक भयंकर और क्रूर रूप में चित्रित किया जाता है, लेकिन यह उनकी सुरक्षात्मक प्रकृति का ही प्रतीक है।
- उनके स्वरूप का वर्णन: व्याली को अक्सर शेर या बाघ जैसी शक्तिशाली जानवरों के रूप में चित्रित किया जाता है, उनके शरीर पर विभिन्न प्रकार के सजावट जैसे कि आभूषण और रत्न होते हैं।
- उनकी भूमिका: व्याली का मुख्य कार्य उन स्थानों की रक्षा करना है जहाँ धार्मिक अनुष्ठान, पूजा, यज्ञ आदि किए जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि उनकी उपस्थिति से बुरी शक्तियाँ और अशुभ प्रभाव दूर होते हैं।
- लोकप्रियता: व्याली का पूजन भारत के विभिन्न हिस्सों में, विशेषकर उत्तर भारत में किया जाता है। उन्हें मंदिरों, घरों और पूजा स्थलों में चित्रित किया जाता है।
- उनका महत्व: व्याली देवी की पूजा करके, लोग खुद को और अपने घरों को नकारात्मक प्रभावों से सुरक्षित रखने की आशा रखते हैं। वे उन्हें शक्ति, धन और समृद्धि प्रदान करने वाली भी मानते हैं।
व्याली देवी, हिंदू धर्म की एक प्राचीन और महत्वपूर्ण देवी हैं जिनकी शक्ति और रक्षा क्षमता के लिए उन्हें पूरे देश में सम्मानित किया जाता है।
The Amruteshvara temple also spelt "Amrutesvara" or "Amruteshwara", is located in the village of Amruthapura, 67 km north of Chikmagalur town in the Chikkamagaluru district of the Karnataka state, India. Located 110 km from Hassan and 50 km from Shimoga on NH 206, Amruthapura is known for the Amruteshvara temple. The temple was built in 1196 CE by Amrutheshwara Dandanayaka under Hoysala King Veera Ballala II.