Vidyāraṃbhaṃ

विद्यारम्भं

Vidyāraṃbhaṃ

Hindu rite of passage for young children

विद्यारंभम्: ज्ञान की ओर पहला कदम

विद्यारंभम्, जिसका अर्थ है "विद्या का आरंभ", एक हिन्दू धार्मिक संस्कार है जो किसी बच्चे की औपचारिक शिक्षा शुरू करने से पहले किया जाता है। इसे अक्षर अभ्यासम भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है "अक्षरों का अभ्यास", और तमिल में इसे मुतल एलुट्टू कहते हैं, जिसका अर्थ है "पहला शब्द"। यह संस्कार ज्ञान की देवी, सरस्वती, को समर्पित है। यह दक्षिण भारतीय राज्यों कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में बहुत प्रचलित है।

संस्कार का महत्व:

यह संस्कार बच्चे के जीवन में ज्ञान और शिक्षा के महत्व पर जोर देता है। यह माना जाता है कि इस दिन देवी सरस्वती की कृपा से बच्चे का मन ज्ञान ग्रहण करने के लिए तैयार होता है और उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।

संस्कार का स्वरुप:

  • इस दिन बच्चे को नए कपड़े पहनाकर, माथे पर तिलक लगाकर, देवी सरस्वती और भगवान गणेश की पूजा की जाती है।
  • एक थाली में चावल बिछाकर, बच्चे को गुरु या किसी बड़े व्यक्ति की सहायता से उस पर "ॐ" लिखवाया जाता है।
  • इसके बाद बच्चे को मंत्रों का उच्चारण करके अक्षर ज्ञान कराया जाता है।
  • कुछ जगहों पर बच्चे को स्लेट या पाटी पर लिखना भी सिखाया जाता है।
  • इस अवसर पर परिवार के लोग और रिश्तेदार भी मौजूद रहते हैं और बच्चे को आशीर्वाद देते हैं।

विद्यारंभम् संस्कार ना सिर्फ़ एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह बच्चे के मन में ज्ञान के प्रति जिज्ञासा और रुचि जगाने का एक सुंदर प्रयास भी है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और आज भी यह उतनी ही प्रासंगिक है जितनी पहले हुआ करती थी।


Vidyarambham, also rendered Akshara Abhyasam, and Mutal Eluttu is a Hindu initiation ceremony that is performed before a child begins their formal education. This ritual is dedicated to the goddess of learning, Saraswati. It is popular in the South Indian states of Karnataka, Kerala, Tamil Nadu, Andhra Pradesh, and Telangana.