अनंतशयन विष्णु
Recurring theme in Hinduist art
अनंतशायी विष्णु: ओडिशा की एक विशाल शिल्प कृति
अनंतशायी विष्णु, जिसे अनंतशयन विष्णु भी कहा जाता है (दोनों का अर्थ है "सर्प अनंत पर सोता हुआ"), ओडिशा के ढेंकानाल जिले में परजंग पुलिस स्टेशन के अंतर्गत सारंगा गांव में स्थित एक विशाल खुली हवा में क्षैतिज शिला शिल्प है। यह ब्रह्मणी नदी के बाएं किनारे पर स्थित है। यह भारत में क्षैतिज स्थिति में सबसे बड़ा इस तरह का उजागर शिला कट संरचना है, जिसकी लंबाई 15.4 मीटर (51 फीट) है। दक्षिण भारत में गोमतेश्वर की सबसे बड़ी खड़ी प्रतिमा है। यह एक संरक्षित स्मारक है जिसका रखरखाव भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, भुवनेश्वर सर्किल द्वारा किया जाता है। चार भुजाओं वाले शयन विष्णु को आज भी पूजा जाता है।
विवरण:
- स्थान: सारंगा गांव, परजंग पुलिस स्टेशन, ढेंकानाल जिला, ओडिशा, भारत
- नदी: ब्रह्मणी नदी
- समय: 9वीं शताब्दी की शुरुआत
- आकार: 15.4 मीटर (51 फीट) लंबाई
- प्रकार: क्षैतिज शिला शिल्प
- देवता: विष्णु
- विशेषताएं: चार भुजाएं, अनंत सर्प पर शयन करते हुए
- महत्व: भारत में क्षैतिज स्थिति में सबसे बड़ा शिला कट संरचना
अनंतशायी विष्णु की शिल्प कला:
शिल्प में विष्णु को अनंत नामक सर्प पर विश्राम करते हुए दर्शाया गया है। विष्णु के चार हाथ हैं, जिसमें एक हाथ में शंख, दूसरे में चक्र, तीसरे में कमल और चौथे में गदा है। उनकी आँखें बंद हैं और उनका चेहरा शांत और गंभीर है। शिल्प के चारों ओर विभिन्न देवताओं और अप्सराओं की मूर्तियाँ हैं।
अनंतशायी विष्णु का महत्व:
यह शिल्प कला केवल एक कलात्मक कृति नहीं है, बल्कि यह हिंदू धर्म के महत्वपूर्ण देवता विष्णु की शक्ति और महिमा का प्रतीक है। यह शिल्प कला भारत की प्राचीन शिल्प कला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है और यह दुनिया भर के पर्यटकों और कला प्रेमियों को आकर्षित करता है।