Kalpataru Day

कल्पतरु दिवस

Kalpataru Day

Hindu religious festival

कल्पतरु दिवस: एक विस्तृत विवरण

कल्पतरु दिवस, जिसे कल्पतरु दिवस या कल्पतरु उत्सव भी कहा जाता है, हिन्दू धर्म के रामकृष्ण मठ के साधुओं और रामकृष्ण मिशन के अनुयायियों के साथ-साथ दुनिया भर में वेदांत समाजों द्वारा मनाया जाने वाला एक वार्षिक धार्मिक उत्सव है। ये संगठन 19वीं शताब्दी के भारतीय रहस्यवादी और बंगाली पुनर्जागरण के प्रमुख व्यक्ति, रामकृष्ण के उपदेशों का पालन करते हैं।

यह उत्सव 1 जनवरी 1886 को मनाया जाता है, जिस दिन रामकृष्ण के अनुयायियों का मानना है कि रामकृष्ण ने खुद को अवतार, यानी धरती पर भगवान का अवतार, के रूप में प्रकट किया था। यह हर साल 1 जनवरी को मनाया जाता है।

यह उत्सव कई स्थानों पर मनाया जाता है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण समारोह कलकत्ता (अब कोलकाता) के पास काशीपुर गार्डन हाउस या उद्यानबती में होता है, जो वर्तमान में रामकृष्ण मठ का एक शाखा है। रामकृष्ण ने अपने जीवन के अंतिम दिन यहीं बिताए थे।

इस दिन को रामकृष्ण के शिष्य रामचंद्र दत्त ने "कल्पतरु दिवस" नाम दिया था। इस घटना ने शिष्यों के लिए ब्रह्मांडीय महत्व के अर्थों और यादों को लेकर आता था और साथ ही रामकृष्ण की मृत्यु के लिए उन्हें तैयार भी किया था, जो कुछ महीनों बाद 16 अगस्त 1886 को हुई थी।

विशेष विवरण:

  • तिथि: हर साल 1 जनवरी
  • महत्व: रामकृष्ण द्वारा अवतार के रूप में खुद को प्रकट करने के दिन को मनाना
  • मुख्य समारोह स्थल: काशीपुर गार्डन हाउस (उद्यानबती), कोलकाता
  • कौन मनाते हैं: रामकृष्ण मठ के साधु, रामकृष्ण मिशन के अनुयायी, और दुनिया भर में वेदांत समाज
  • नामकरण: रामकृष्ण के शिष्य रामचंद्र दत्त द्वारा
  • महत्वपूर्ण बिंदु: इस दिन ने शिष्यों के लिए ब्रह्मांडीय महत्व के अर्थों और यादों को लेकर आता था, साथ ही रामकृष्ण की मृत्यु के लिए उन्हें तैयार भी किया था.

Kalpataru Day also called Kalpataru Diwas or Kalpataru Utsav is an annual religious festival observed by monks of the Ramakrishna Math monastic order of Hinduism and lay followers of the associated Ramakrishna Mission, as well as the worldwide Vedanta Societies. These organizations follow the teachings of Ramakrishna, the 19th century Indian mystic and figure in the Bengali Renaissance.