अभयनंडा
अभयानंद: पहली महिला स्वामी
अभयानंद, जिनका जन्म 1842 में मेरी लुईस के रूप में हुआ था, स्वामी विवेकानंद के मिशन में दीक्षा लेने वाली पहली महिला थीं। वे पहली अमेरिकी महिला और पश्चिमी महिला भी थीं जो स्वामी भिक्षु बनीं।
विवेकानंद से दीक्षा:
1895 में, थाउजेंड आइलैंड पार्क में स्वामी विवेकानंद ने मेरी लुईस को दीक्षा दी और उन्हें "अभयानंद" नाम दिया गया। बाद में, उन्होंने विवेकानंद से खुद को अलग कर लिया लेकिन दर्शनशास्त्र का प्रचार करना जारी रखा और अपना नाम अभयानंद ही रखा। अभयानंद ने खुद को दुनिया की एकमात्र महिला स्वामी होने का दावा किया।
अन्य पश्चिमी शिष्य:
हालांकि, अभयानंद अकेली पश्चिमी महिला नहीं थीं जो हिंदू धर्म और साधु जीवन की ओर आकर्षित हुईं। बीसवीं सदी के पूर्वार्ध में, कई अन्य पश्चिमी लोग भी हिंदू शिष्य, संन्यासी और गुरु बने। इनमे "द मदर" (जन्म मीरा अल्फासा, पेरिस, 1878) शामिल थीं, जो शायद भारत में गुरु बनने वाली पहली पश्चिमी महिला थीं। स्वामी विवेकानंद ने 1895 में तीन पश्चिमी लोगों को संन्यास की दीक्षा दी थी, जिनमे अभयानंद के अलावा लियोन लैंड्सबर्ग / स्वामी कृपानंद और डॉ. स्ट्रीट / स्वामी योगानंद शामिल थे।
अभयानंद का महत्व:
अभयानंद का जीवन पश्चिमी महिलाओं के लिए एक मिसाल है जिन्होंने हिंदू धर्म और आध्यात्मिकता में अपना मार्ग खोजा। उनके साधना और दृढ़ संकल्प ने दुनिया को दिखाया कि आध्यात्मिकता की राह पर लिंग कोई बाधा नहीं है।