Lectures from Colombo to Almora

कोलंबो से अल्मोड़ा तक व्याख्यान

Lectures from Colombo to Almora

Book based on lectures by Vivekananda

लेक्चर्स फ्रॉम कोलम्बो टू अल्मोड़ा: एक विस्तृत विवरण

यह पुस्तक स्वामी विवेकानंद के उन व्याख्यानों का संग्रह है जो उन्होंने पश्चिम से लौटने के बाद श्रीलंका और भारत में दिए थे। यह पुस्तक १८९७ में प्रकाशित हुई थी।

१५ जनवरी १८९७ को, स्वामीजी ब्रिटिश सीलोन (अब श्रीलंका) के कोलम्बो पहुँचे। कोलम्बो और जाफना में कई व्याख्यान देने के बाद, वह दक्षिण भारत के पाम्बन पहुँचे। पश्चिम में उनकी उपलब्धियों का जश्न मनाने के लिए, रामनाद के राजा भास्कर सेतुपति ने उस स्थान पर एक चालीस फुट ऊँचा स्मारक बनवाया जहाँ स्वामीजी ने पहली बार भारतीय धरती पर कदम रखा था।

भारत आगमन के बाद, स्वामीजी ने देश के विभिन्न हिस्सों की यात्रा की और कई विषयों पर व्याख्यान दिए। १९ जून १८९७ को, वह अल्मोड़ा पहुँचे। इसी अवधि में दिए गए उनके व्याख्यानों को "लेक्चर्स फ्रॉम कोलम्बो टू अल्मोड़ा" नामक इस पुस्तक में संकलित किया गया है।

यह पुस्तक स्वामी विवेकानंद के विचारों और शिक्षाओं का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है:

  • वेदांत और योग: इस पुस्तक में, स्वामीजी ने वेदांत और योग के सिद्धांतों को सरल और सुबोध भाषा में समझाया है।
  • भारतीय संस्कृति और राष्ट्रवाद: स्वामीजी ने भारतीय संस्कृति और दर्शन की महानता पर प्रकाश डाला और लोगों में राष्ट्रीय चेतना जगाने का प्रयास किया।
  • सामाजिक सुधार: उन्होंने जातिवाद, छुआछूत, अंधविश्वास जैसी सामाजिक बुराइयों की कड़ी आलोचना की और समाज में समानता और न्याय की वकालत की।
  • शिक्षा का महत्व: स्वामीजी ने शिक्षा के महत्व पर जोर दिया और कहा कि शिक्षा ही व्यक्ति और राष्ट्र के विकास की कुंजी है।

यह पुस्तक आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी उस समय थी जब इसे पहली बार प्रकाशित किया गया था। यह हमें स्वामी विवेकानंद के विचारों और आदर्शों से प्रेरणा लेने और उन्हें अपने जीवन में उतारने के लिए प्रेरित करती है।


Lectures from Colombo to Almora (1897) is a book of Swami Vivekananda based on the lectures he delivered in Sri Lanka and India after his return from the West. Vivekananda reached Colombo, British Ceylon on 15 January 1897. After delivering lectures in Colombo and Jaffna, Vivekananda arrived at Pamban in South India. A forty-feet high monument was built by the king of Ramnad, Bhaskara Sethupathi, on the spot where he landed to celebrate his achievements at the West. Vivekananda travelled extensively and visited many Indian states delivering lectures on a variety of topics. On 19 June 1897, he reached Almora. The lectures delivered by him in this period were compiled into the book Lectures from Colombo to Almora.