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इंचेगेरी संप्रदाय
Inchegeri Sampradaya
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इंचागेरी संप्रदाय: एक विस्तृत दृष्टि
इंचागेरी संप्रदाय, जिसे निंबर्गी संप्रदाय भी कहा जाता है, महाराष्ट्र और कर्नाटक में फैला एक हिन्दू धार्मिक सम्प्रदाय है। यह सम्प्रदाय नवनाथ परंपरा और लिंगायत धर्म से जुड़ा हुआ है, और इसकी स्थापना भाऊसाहेब महाराज ने की थी।
प्रमुख विशेषताएँ:
- मूल प्रेरणा: इस सम्प्रदाय को संत मत के प्रमुख संतों - नामदेव, रैदास और कबीर - से गहरी प्रेरणा मिली है।
- सरल उपासना: इंचागेरी संप्रदाय भक्ति मार्ग पर ज़ोर देता है और ईश्वर की प्राप्ति के लिए सरल साधनाओं पर बल देता है।
- सामाजिक समरसता: यह सम्प्रदाय जाति-पाति और ऊँच-नीच के भेदभाव को नहीं मानता और सभी मनुष्यों को एक समान देखता है।
- गुरु परंपरा: इस सम्प्रदाय में गुरु को अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। शिष्य के आध्यात्मिक उत्थान में गुरु का मार्गदर्शन अनिवार्य माना जाता है।
वैश्विक पहचान:
इंचागेरी संप्रदाय को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने में निसारगदत्त महाराज का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनकी शिक्षाओं ने पश्चिमी देशों में भी लोगों को आकर्षित किया है।
निष्कर्ष:
इंचागेरी संप्रदाय भक्ति, प्रेम और सामाजिक समरसता का संदेश देता है। यह संप्रदाय आध्यात्मिक साधना को सरल बनाकर ईश्वर की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है।
The Inchagiri Sampradaya, also known as Nimbargi Sampradaya, is a lineage of Hindu Navnath and Lingayat teachers from Maharashtra and Karnataka, which was started by Bhausaheb Maharaj. It is inspired by Sant Mat teachers as Namdev, Raidas and Kabir. The Inchagiri Sampradaya has become well known throughout the western world due to the popularity of Nisargadatta Maharaj.

