To the Fourth of July

4 जुलाई तक

To the Fourth of July

स्वामी विवेकानंद और "चौथी जुलाई को"

यह एक खाली विकिपीडिया पृष्ठ है, लेकिन यहाँ हम "चौथी जुलाई को" कविता के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे।

स्वामी विवेकानंद, एक महान भारतीय संत और समाज सुधारक, ने "चौथी जुलाई को" नामक एक अंग्रेजी कविता लिखी थी। यह कविता उन्होंने 4 जुलाई 1898 को अमेरिका के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लिखी थी।

इस कविता में, स्वामीजी ने स्वतंत्रता की प्रशंसा और महिमामंडन किया है। यह कविता उनकी स्वतंत्रता की तीव्र लालसा का एक भावुक उद्गार मानी जाती है।

यह एक संयोग ही है कि स्वामी विवेकानंद का स्वर्गवास भी 4 जुलाई 1902 को हुआ था, जो कि अमेरिका के स्वतंत्रता दिवस का दिन था।

कविता का सारांश:

  • कविता में स्वामी विवेकानंद ने स्वतंत्रता के महत्व पर प्रकाश डाला है।
  • उन्होंने अमेरिका को स्वतंत्रता का प्रतीक बताया है।
  • कविता में स्वामीजी ने सभी देशों के लोगों से एकजुट होकर अन्याय और अत्याचार के खिलाफ लड़ने का आह्वान किया है।
  • उन्होंने कविता में यह भी कहा है कि स्वतंत्रता कोई भीख नहीं है, बल्कि यह तो जन्मसिद्ध अधिकार है।

कविता का महत्व:

  • यह कविता स्वामी विवेकानंद के उदारवादी विचारों को दर्शाती है।
  • यह कविता हमें स्वतंत्रता के महत्व को समझने और उसके लिए संघर्ष करने की प्रेरणा देती है।
  • यह कविता हमें अन्याय और अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने का संदेश देती है।

स्वामी विवेकानंद की यह कविता आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी उस समय थी जब इसे लिखा गया था। यह कविता हमें हमेशा याद दिलाती है कि स्वतंत्रता कितनी महत्वपूर्ण है और इसके लिए संघर्ष करते रहना कितना जरूरी है।


"To the Fourth of July" is an English poem written by Indian monk and social reformer Swami Vivekananda. Vivekananda wrote the poem on 4 July 1898 on the anniversary of the United States' independence.