अपस्मार
Apasmara
Sanskrit term and being in Hindu mythology
अपस्मार: अज्ञानता का प्रतीक
हिंदू धर्म में, अपस्मार एक राक्षस है जो आध्यात्मिक अज्ञानता और बेतुकी बातों का प्रतिनिधित्व करता है। उसे मुयालक या मुयालकन भी कहा जाता है।
अपस्मार को अक्सर एक बौने व्यक्ति के रूप में चित्रित किया जाता है। यह नाम संस्कृत शब्द "अप" और "स्मृ" से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है "याद न रखने की स्थिति" या "भूलने की बीमारी"। यह नाम उस अज्ञानता और भ्रम का प्रतीक है जो आध्यात्मिक ज्ञान की कमी के कारण उत्पन्न होता है।
अपस्मार का वर्णन विभिन्न धार्मिक ग्रंथों में मिलता है, जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं:
- पुराण: पुराणों में अपस्मार को भगवान शिव के क्रोध से उत्पन्न एक राक्षस बताया गया है।
- योग दर्शन: पतंजलि के योग दर्शन में, अपस्मार को पाँच क्लेशों (दुखों) में से एक माना गया है जो मन को अशांत करते हैं।
अपस्मार का रूपक हमें याद दिलाता है कि हमें आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने और अज्ञानता को दूर करने के लिए निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए।
Apasmara is a dwarf who represents spiritual ignorance and nonsensical speech in Hindu mythology. He is also known as Muyalaka or Muyalakan.