U. G. Krishnamurti
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यूजी कृष्णमूर्ति

U. G. Krishnamurti

Indian philosopher (1918–2007)

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उप्पलूरी गोपाला कृष्णमूर्ति: एक सरल व्याख्या (हिंदी में)

उप्पलूरी गोपाला कृष्णमूर्ति (९ जुलाई १९१८ - २२ मार्च २००७), जिन्हें यू.जी. के नाम से भी जाना जाता है, एक दार्शनिक और वक्ता थे जिन्होंने आध्यात्मिक मुक्ति की अवधारणा पर ही सवाल उठाए।

प्रारंभिक जीवन और आध्यात्मिक खोज:

यू.जी. ने अपनी युवावस्था में धार्मिक मार्ग अपनाया और विभिन्न आध्यात्मिक परंपराओं का अध्ययन किया। उन्होंने रामाकृष्ण परमहंस, विवेकानंद और जिद्दू कृष्णमूर्ति जैसे गुरुओं के साथ समय बिताया। हालाँकि, अंततः उन्होंने इन सभी को अस्वीकार कर दिया, यह मानते हुए कि कोई भी मार्ग वास्तविक मुक्ति तक नहीं ले जा सकता।

"दुर्घटना" और "प्राकृतिक अवस्था":

४९ वर्ष की आयु में, यू.जी. ने एक गहन जैविक परिवर्तन का अनुभव किया, जिसे वे "दुर्घटना" कहते थे। उनका दावा था कि इस घटना ने उन्हें "प्राकृतिक अवस्था" में वापस ला दिया - एक ऐसी अवस्था जहाँ दुख, इच्छा और आध्यात्मिक खोज का अभाव था।

यू.जी. ने जोर देकर कहा कि यह परिवर्तन एक दुर्लभ, अकारण और जैविक घटना थी जिसका धर्म से कोई लेना-देना नहीं था। वे लोगों को "प्राकृतिक अवस्था" को एक आध्यात्मिक लक्ष्य के रूप में आगे बढ़ाने से हतोत्साहित करते थे, यह मानते हुए कि यह एक स्वाभाविक घटना थी न कि प्रयास का परिणाम।

विचार और ज्ञान की अस्वीकृति:

यू.जी. ने विचार की नींव को ही खारिज कर दिया। उनका मानना था कि विचार ही दुख और संघर्ष का मूल कारण हैं। इस प्रकार, उन्होंने सभी विचार प्रणालियों, दर्शनों और ज्ञान को नकार दिया। वे अपने कथनों को अनुभवात्मक मानते थे, न कि सट्टा। उनका कहना था, "उन्हें बताओ कि समझने के लिए कुछ भी नहीं है।"

जिद्दू कृष्णमूर्ति से संबंध:

हालांकि उनका कोई पारिवारिक रिश्ता नहीं था, यू.जी. की मुलाकात जिद्दू कृष्णमूर्ति से कई बार हुई क्योंकि दोनों का थियोसोफिकल सोसाइटी से जुड़ाव था। हालांकि यू.जी. ने अंततः जिद्दू की शिक्षाओं को भी अस्वीकार कर दिया था, वे कभी-कभी उन्हें अपना "शिक्षक" कहते थे।

निष्कर्ष:

यू.जी. एक अद्वितीय और विवादास्पद व्यक्ति थे जिन्होंने आध्यात्मिकता के प्रति एक गैर-परंपरागत दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उनका मानना था कि सच्ची मुक्ति किसी भी प्रकार की खोज या प्रयास से नहीं, बल्कि "प्राकृतिक अवस्था" में सहज वापसी से प्राप्त होती है। उन्होंने अपने विचारों को स्पष्ट और बेबाक तरीके से व्यक्त किया, जिससे वे अपने समय के सबसे चुनौतीपूर्ण और उत्तेजक विचारकों में से एक बन गए।


Uppaluri Gopala Krishnamurti was a philosopher and orator who questioned the state of spiritual liberation. Having pursued a religious path in his youth and eventually rejecting it, U.G. claimed to have experienced a devastating biological transformation on his 49th birthday, an event he refers to as "the calamity". He emphasized that this transformation back to "the natural state" is a rare, acausal, biological occurrence with no religious context. Because of this, he discouraged people from pursuing the "natural state" as a spiritual goal.