महेश की रथयात्रा
A Rathyatra in Mahesh
महेश का रथयात्रा: बंगाल का सबसे पुराना रथ उत्सव
महेश का रथयात्रा (বাংলা: মাহেশের রথযাত্রা) बंगाल का सबसे पुराना रथ त्योहार है, और ऐसा माना जाता है कि यह 1396 से मनाया जा रहा है। यह उत्सव पश्चिम बंगाल के सेरामपुर के एक ऐतिहासिक इलाके महेश में होता है।
शुरूआत: जगन्नाथ देब का पहला मंदिर शिवपुर राज के राजा मनोहर रॉय ने बनवाया था। उन्होंने जगन्नाथपुर मौजा की स्थापना में भी बड़ी मात्रा में भूमि दान की थी।
उत्सव: यह एक सप्ताह तक चलने वाला त्यौहार है और इस दौरान एक भव्य मेला लगता है। लोग भगवान जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा के रथों से जुड़ी लंबी रस्सियों (रोशी) को खींचने के लिए उड़ते हैं।
रथयात्रा: रथयात्रा मंदिर से शुरू होकर महेश गुंडिचा बारी (या, मसीर बारी) तक जाती है और 8वें दिन वापस आती है।
महत्व: यह त्यौहार भाईचारे और एकता का प्रतीक है, और लोगों में काफी उत्साह और उमंग भरता है। यह रथयात्रा सदियों से चली आ रही परंपरा का प्रतीक है और बंगाली संस्कृति का एक अभिन्न अंग है।