Tattwabodhini Patrika

तत्त्वबोधिनी पत्रिका

Tattwabodhini Patrika

Indian newspaper established by Devendranath Tagore in 1843

तत्त्वबोधिनि पत्रिका: सत्य की खोज का एक सफर

तत्त्वबोधिनि पत्रिका एक महत्वपूर्ण बंगाली पत्रिका थी जो 16 अगस्त 1843 को देवेन्द्रनाथ टैगोर द्वारा स्थापित की गई थी। यह तत्त्वबोधिनि सभा का प्रकाशन था और 1883 तक लगातार प्रकाशित होती रही। पत्रिका कोलकाता, भारत से प्रकाशित होती थी।

तत्त्वबोधिनि नाम का अर्थ है "सत्य की खोज"। पत्रिका का उद्देश्य भारतीय समाज में प्रचलित रूढ़िवादी विचारों और अंधविश्वासों को चुनौती देना और तर्क, विज्ञान और ज्ञान के आधार पर एक नई सोच को जगाना था।

पत्रिका के संपादकीय मंडल में कई प्रतिष्ठित व्यक्ति शामिल थे:

  • देवेन्द्रनाथ टैगोर: ब्रह्म समाज के संस्थापक और एक प्रसिद्ध धार्मिक नेता।
  • ईश्वरचंद्र विद्यासागर: एक प्रसिद्ध शिक्षाविद, समाज सुधारक और बंगाली साहित्य के प्रणेता।
  • अक्षय कुमार दत्त: एक समाज सुधारक और पत्रकार।
  • राजनारायण बासु: एक दार्शनिक और धार्मिक नेता।
  • राजेंद्रलाल मित्र: एक खगोलशास्त्री, भूगोलवेत्ता और प्राकृतिक इतिहास के विद्वान।
  • द्विजेंद्रनाथ टैगोर: देवेन्द्रनाथ टैगोर के पुत्र और एक प्रसिद्ध लेखक, कवि और नाटककार।

तत्त्वबोधिनि पत्रिका ने अपने प्रकाशन काल में विभिन्न विषयों पर लेख, निबंध, कविताएँ और कहानियाँ प्रकाशित कीं। पत्रिका में धार्मिक विचारों, समाज सुधार, शिक्षा, विज्ञान और कला के क्षेत्रों में नए विचारों और दृष्टिकोणों को प्रस्तुत किया गया।

तत्त्वबोधिनि पत्रिका के लेखन ने भारतीय समाज में एक नई चेतना का निर्माण किया और समाज सुधार आंदोलन को बढ़ावा दिया। यह पत्रिका अपने समय की एक महत्वपूर्ण प्रकाशन थी जिसने न केवल बंगाल, बल्कि पूरे भारत में नवजागरण के बीज बोए।


Tattwabodhini Patrika was established by Debendranath Tagore on 16 August 1843, as a journal of the Tattwabodhini Sabha, and continued publication until 1883. It was published from Kolkata, India. Its editorial board including Debendranath Tagore, Ishwar Chandra Vidyasagar, Akshay Kumar Dutta, Rajnarayan Basu, Rajendralal Mitra and Dwijendranath Tagore.