सत्त्रिया नृत्य
One of the classical dances of India
सत्त्रिया नृत्य: असम की एक अनमोल धरोहर (Sattriya Dance: A Priceless Heritage of Assam)
सत्त्रिया नृत्य, जिसे सत्त्रिया नृत्य भी कहा जाता है, भारत के आठ शास्त्रीय नृत्यों में से एक है। यह नृत्य रूप असम की धरती से निकला है और इसका इतिहास 15वीं-16वीं शताब्दी से जुड़ा हुआ है।
श्रीमंत शंकरदेव: सत्त्रिया नृत्य का जन्मदाता श्रीमंत शंकरदेव जी को माना जाता है। वे असम के एक महान संत, कवि, नाटककार, समाज सुधारक और एकेशरण धर्म के प्रवर्तक थे।
भांओना और अंकिया नाट: श्रीमंत शंकरदेव ने 'अंकिया नाट' नामक एकांकी नाटकों की रचना की थी। भांओना इन्हीं अंकिया नाटों का मंचन होता है, और सत्त्रिया नृत्य इसी भांओना का एक अभिन्न अंग है।
सत्त्र: 'सत्त्र' ऐसे धार्मिक संस्थान होते हैं जहाँ एकेशरण धर्म के अनुयायी एक साथ रहकर भक्ति करते हैं। सत्त्रिया नृत्य इन्हीं सत्त्रों में पीढ़ी दर पीढ़ी जीवित रहा है।
विषयवस्तु: सत्त्रिया नृत्य में मुख्य रूप से भगवान कृष्ण के जीवन और लीलाओं का वर्णन किया जाता है। इसके अलावा, भगवान विष्णु के अन्य अवतारों जैसे राम, तथा महाभारत और रामायण जैसे महाकाव्यों के प्रसंगों को भी सत्त्रिया नृत्य में दर्शाया जाता है।
मान्यता: 15 नवंबर 2000 को, भारत की संगीत नाटक अकादमी ने सत्त्रिया को भारत के आठ शास्त्रीय नृत्यों में से एक के रूप में मान्यता दी।
वर्तमान समय में सत्त्रिया: आज, सत्त्रिया नृत्य ने नए आयाम छुए हैं। अनेक विषयों और नाटकों को सत्त्रिया नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया जा रहा है। इसके प्रदर्शन दुनिया भर में आयोजित किए जाते हैं और यह नृत्य रूप विश्व पटल पर अपनी पहचान बना रहा है।