Upakarma

उपाकर्म

Upakarma

Hindu observance

उपाकर्म: एक वैदिक अनुष्ठान

उपाकर्म (संस्कृत: उपाकर्म, अर्थ: 'आरंभ'), जिसे अवनि अविट्टम (तमिल: ஆவணி அவிட்டம், मलयालम: ആവണി അവിട്ടം), जनिवरदा हुन्निमे (कन्नड़: ಜನಿವಾರದ ಹುಣ್ಣಿಮೆ), गह्मा पूर्णिमा (ओडिया: ଗହ୍ମା ପୂର୍ଣିମା) और जंध्याल पौर्णमि (तेलुगु: జంధ్యాల పౌర్ణమి) भी कहा जाता है, एक वैदिक अनुष्ठान है जिसका पालन हिंदू, विशेष रूप से ब्राह्मण करते हैं।

इस अनुष्ठान के दौरान, पुरुष अपने पवित्र जनेऊ (यज्ञोपवीत) को बदलते हैं और एक नया जनेऊ धारण करते हैं।

उपाकर्म कब मनाया जाता है?

यह अनुष्ठान साल में एक बार श्रावण मास के श्रवण या धनिष्ठा नक्षत्र में किया जाता है। यह दिन आमतौर पर श्रावण नक्षत्र के एक दिन बाद पड़ता है, जिस दिन केरल में ओणम का त्यौहार मनाया जाता है। इस दिन को भारत के अन्य हिस्सों में श्रावण पूर्णिमा भी कहा जाता है।

उपाकर्म के दौरान क्या किया जाता है?

इस दिन ब्राह्मण वैदिक रीति-रिवाजों के साथ अपना यज्ञोपवीत (जनेऊ) बदलते हैं और वेद मंत्रों की रचना करने वाले ऋषियों को अर्घ्य अर्पित करते हैं। अगले दिन, जो आमतौर पर उत्तर और मध्य भारत में रक्षा बंधन के त्योहार के साथ मेल खाता है, गायत्री मंत्र का 1,008 बार जाप किया जाता है।

सामवेद ब्राह्मण उपाकर्म और जनेऊ परिवर्तन भाद्रपद मास के तीसरे दिन करते हैं।

अधिक जानकारी:

  • उपाकर्म एक महत्वपूर्ण हिंदू संस्कार है जो वेदों के प्रति सम्मान और निष्ठा को दर्शाता है।
  • जनेऊ परिवर्तन आध्यात्मिक शुद्धि और नए सिरे से शुरुआत का प्रतीक है।
  • यह अनुष्ठान परिवार और समुदाय के बीच एकता और बंधुत्व को बढ़ावा देता है।

Upakarma, also called Avani Avittam, Janivarada Hunnime, Gahma Purnima, and Jamdhyala Paurnami is a Vedic ritual practiced by Hindus especially Brahmanas: During the ritual, men change their sacred thread and begin to don a new one.