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पूर्वाफाल्गुनी

पूर्वाफाल्गुनी


पूर्वाफाल्गुनी

🌟 राशि: सिंह

🌟 नक्षत्र देवता: भग

🌟 नक्षत्र स्वामी: शुक्र

यदि आपका जन्म पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में हुआ है तो आप ऐसे भाग्यशाली व्यक्ति हैं जो समाज में सम्माननीय हैं और जिनका अनुसरण हर कोई करना चाहता है। परिवार में भी आप एक मुखिया की भूमिका में रहते हैं। ऐसे लोगों को संगीत और कला की विशेष समझ होती है जो बचपन से ही दिखाई देने लगती है। ये लोग नैतिकता और ईमानदारी के रास्ते पर चलकर ही अपना जीवन व्यतीत करते हैं। शांति पसंद होने की वजह से किसी भी तरह के विवाद या लड़ाई-झगड़े में पड़ना पसंद नहीं करते। इनके पास धन की मात्रा अच्छी खासी होती है जिसकी वजह से ये भौतिक सुखों का आनंद उठाते हैं। ये लोग अहंकारी प्रवृत्ति के होते हैं।

शिक्षा और आय

रोज़गार के क्षेत्र में आप अपने कार्य बदलते रहेंगे। आयु के 22, 27, 30, 32, 35, 37 और 44 वर्ष नौकरी और व्यवसाय के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे। आप सरकारी कर्मचारी, उच्च अधिकारी, स्त्रियों के वस्त्राभूषण व सौंदर्य-प्रसाधन के निर्माता या विक्रेता, जनता का मनोरंजन करने वाले कलाकार, मॉडल, फ़ोटोग्राफ़र, गायक, अभिनेता, संगीतज्ञ, विवाह के लिए वस्त्राभूषण या उपहार सामग्री का व्यापार करने वाले, जीव विज्ञानी, आभूषण निर्माता, सूती, ऊनी या रेशमी वस्त्र के कार्य करने वाले आदि हो सकते हैं।

पारिवारिक जीवन

आपका पारिवारिक जीवन सुखी होगा। जीवनसाथी और बच्चे अच्छे स्वभाव के मिलेंगे और उनसे भरपूर सुख प्राप्त होगा। आपका जीवनसाथी कर्तव्यनिष्ठ होगा और अपने परिवार के लिए सब कुछ न्योछावर करने को तत्पर रहेगा। आप प्रेम-विवाह भी कर सकते हैं या किसी पूर्व परिचित व्यक्ति से विवाह कर सकते हैं।

प्रथम चरण : इसका स्वामी सूर्य है। नवमांश सिंह। यह स्व प्रतिष्ठा, वैभव, शान का द्योतक है। जातक घड़ियाल समान सिर, अल्प केश, श्वेत आंखे, लोमड़ी सामान शरीर, लम्बा पेट, साहसी, मोटे चौड़े तीखे दांत वाला होता है।जातक साहसी, पत्नी युक्त, माता का भक्त होता है। विपरीत लिंग से अड़चन, रसायन या हॉस्पिटल से आजीविका होती है।

द्वितीय चरण : इसका स्वामी बुध है। नवमांश कन्या। यह धैर्य, संयम, व्यापार, उद्योग का द्योतक है। जातक अल्प रोम, कोमल मटमैले नेत्र, लम्बा, श्याम वर्णी, स्त्री सुलभ सौन्दर्य युक्त, चतुर, शेखी मारने वाला, कार्य साधने में निपुण होता है। जातक महा क्रोधी, जीवन के मध्य मे वासना युक्त, जीवन के अंत मे शांत और चिंता मुक्त होता है।

तृतीय चरण : इसका स्वामी शुक्र है। नवमांश तुला। यह सृजन, तनाव मुक्ति, समान विचार, यात्रा, परिष्कृत, प्रशंसा, परामर्श का द्योतक है। जातक लम्बा मुंह, लम्बा मोटा सिर, हृष्ट-पुष्ट, मांसल देह, श्याम वर्ण, घने रोम, स्त्रियो से कपटी, कूटनीतिज्ञ, ठग, कठोर भाषी होता है।जातक आक्रामक, संताप रहित, अनेक जबाबदारियो से परिपूर्ण होता है। घर मे चोरी होती है, परन्तु नुकसान कम होता है या चोरी गया मॉल मिल जाता है।

चतुर्थ चरण : इसका स्वामी मंगल है। नवमांश वृश्चिक। यह लालसा, वीरता, रंग रूप का द्योतक है। जातक के जीवन मे कलह विशेष होता है। यदि जन्मांग मे सूर्य गुरु अच्छी स्थति मे हो, तो कलह कम होता है। जातक शिष्ट भाषी, स्थिर अंग, गंभीर स्वभाव, कपट दृष्टि, निषिद्ध कार्य करने वाला, गुप्तचर, कुशल होता है।