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स्वाति

स्वाति


स्वाति

🌟 राशि: तुला

🌟 नक्षत्र देवता: वायु

🌟 नक्षत्र स्वामी: राहु

इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक मोती के समान चमकते हैं अर्थात इनका स्वभाव और आचरण स्वच्छ होता है। ये लोग सात्विक और तामसिक दोनों ही प्रवृत्ति वाले होते हैं। एक आकर्षक चेहरे और आकर्षक व्यक्तित्व के स्वामी होते हैं। आपका शरीर भीड़ से अलग सुडौल एवं भरा हुआ होता है। आप जैसा सोचते हैं वैसा करते हैं और दिखावा पसंद नहीं करते है। आप एक स्वतंत्र आत्मा के स्वामी है जिसको किसी के भी आदेश का पालन करना कतई पसंद नहीं। ये लोग राजनीतिक दांव-पेंचों को अच्छी तरह समझते हैं और अपने प्रतिद्वंदियों पर हमेशा जीत हासिल करते हैं।

शिक्षा और आय

दुकानदार-व्यापारी, पहलवान, खिलाड़ी, सरकारी सेवा, परिवहन सेवा, सौंदर्य प्रसाधन, समाचार वाचन, मंच संचालन, कंप्यूटर व सॉफ़्टवेयर से जुड़े कार्य, शिक्षक- प्रशिक्षक, मनोविज्ञान से जुड़े क्षेत्र, वकील-न्यायाधीश, खोजी-अन्वेषक, विमान उद्योग व ग्लाइडिंग आदि कार्य करके सफल हो सकते हैं।

पारिवारिक जीवन

वैवाहिक जीवन में किसी भी प्रकार की बहस या विवाद से आपको बचना चाहिए, वरना दाम्पत्य-जीवन कष्टकारी बन सकता है। आप जितनी मधुरता पारिवारिक जीवन में रखेंगे उतना बेहतर होगा। आप समाज में उच्च प्रतिष्ठा व सम्मान पाने के इच्छुक रहेंगे, जिसकी वजह से आपका ध्यान परिवार की तरफ़ कम हो सकता है; अतः संतुलन बनाए रखें।

प्रथम चरण : इसका स्वामी गुरु है। इसमे शुक्र, राहु, गुरु का प्रभाव है।नवमांश धनु। यह संचार, खुले विचार, लेखन का द्योतक है। जातक गौर वर्ण, अश्व मुखी, सुन्दर पंक्तिबद्ध दन्त, बड़े उन्नत नेत्र, लम्बे हाथ पैर वाला, क्रश, यशश्वी होता है।जातक पूर्ण मेघावी, वाद और विवाद दोनो को सिद्ध करने वाला, असाधारण, व्यवहार मे छल-कपटी, असाधारण अध्यापक, लेखक, प्रवक्ता, रंगमंच कलाकार, पिता से कटु, लघु यात्रा प्रिय, विपरीत लिंग को प्रभावित करने वाला, संतति मे विलम्ब, सुखी दाम्पत्य जीवन होता है।

द्वितीय चरण :इस चरण का स्वामी शनि हैं। राहु व् शनि दो पाप ग्रहों के प्रभाव में आने से जातक अल्पायु होता है. लग्नेश शुक्र की दशा अच्छी जाएगी।राहु और शनि की मित्रता के कारण दोनों की दशाओं में जातक को स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहना होगा । सदव्यवहारी होता है।

तृतीय चरण :इसका स्वामी शनि है। इसमे शुक्र, राहु, शनि का प्रभाव है। नवमांश कुम्भ। यह वृद्धि,सृजन, सहयोग, ज्ञान, लक्ष्य का द्योतक है। जातक गंभीरता युक्त नेत्र, मध्य मे चपटी नाक, घने रूखे केश, स्थिर आत्मा, मित्र प्रिय, सरल ह्रदयी होता है। यह स्वाति नक्षत्र मे सबसे अच्छा चरण है। इसमे आर्थिक और आध्यात्मिक दोनो उन्नति होती है। जातक सीखने की इच्छा के कारण सभी संकायो का ज्ञानी, मस्तिष्क और बुद्धि से पूर्ण विकसित, 42 वर्ष पश्चात जीवन अति उत्तम होता है। इनका प्यार, दाम्पत्य जीवन सुखी होता है

चतुर्थ चरण : इस चरण का स्वामी गुरु हैं। इस नक्षत्र में जन्मा व्यक्ति राजा समान होता है तथा बहुत अधिक भू संपत्ति का स्वामी होता है। राहु एवं गुरु की दशाएं अशुभ फल देंगी।अन्य चरणों की अपेक्षा इस चरण मे जातक अधिक परिश्रमी होता है।