
अनुराधा
🌟 राशि: वृश्चिक
🌟 नक्षत्र देवता: मित्र
🌟 नक्षत्र स्वामी: शनि
इस नक्षत्र में जन्में लोग अपने आदर्शों और सिद्धांतों पर जीते हैं। इनका अधिकाँश जीवन विदेशों में बीतता है और विदेशों में रहकर ये धन और समाज में मान सम्मान दोनों कमाते है। ये लोग अपने गुस्से को नियंत्रित नहीं कर पाते इस कारण इन्हें कई बार बड़े नुकसान उठाने पड़ते हैं। ये लोग अपने दिमाग से ज्यादा दिल से काम लेते हैं और अपनी भावनाओं को छिपाकर नहीं रख पाते। ये लोग जुबान से थोड़े कड़वे होते हैं जिसकी वजह से लोग इन्हें ज्यादा पसंद नहीं करते। आप बहुत साहसी एवं कर्मठ व्यक्तित्व के स्वामी हैं।
शिक्षा और आय
आप अल्पायु से ही रोज़गार करना शुरू कर देंगे यानि 17 से 18 वर्ष की अवस्था से ही कमाना शुरू कर देंगे। आप सम्मोहनकर्ता, तांत्रिक, ज्योतिषी, गुप्तचर, फ़ोटोग्राफ़र, सिनेमा संबंधी कार्य, कला व संगीत से जुड़े कार्य, उद्योग, प्रबंधन, परामर्श, मनोविज्ञान, विज्ञान, अंक शास्त्र, गणित, राजकार्य, व्यवसायी, पर्यटन विभाग से जुड़े कार्य आदि करके सफल हो सकते हैं।
पारिवारिक जीवन
निजी जीवन में आपको अपने सहयोगियों कम मदद मिलेगी। पिता से भी मनमुटाव की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। आप प्राय: अपने जन्म स्थान से दूर रहेंगे। आपकी संतान जीवन में आपसे ज़्यादा उन्नति करेगी।
प्रथम चरण : इसका स्वामी सूर्य है।नवमांश सिंह। यह अंतरंग प्रत्यक्षीकरण,गर्व,वृत्ति उन्मुखता का द्योतक है। जातक लम्बी भुजा, चौड़ा वक्ष, लाल उग्र नेत्र,अल्प केश,बलवान का वध करने वाला, साहसी कर्म करने वाला होता है।जातक व्यावसायिक योग्यता के लिए आतुर, लगातार सीखने और नीचे की पंक्ति मे सुधार के लिए अर्जित ज्ञान का उपयोग करने वाला, अनुशासित, प्रायोगिक होता है।
द्वितीय चरण : इसका स्वामी बुध है।नवमांश कन्या। यह बुद्धि, सीखना,अनुशासन,आयोजन,पूर्ति करना,श्रेणी बद्धता,विवेक,निर्णय का द्योतक है।जातक गौर वर्ण, दृढ़ कंधे व भुजा,कोमल होंठ वाला,धन के लिए प्रयन्तशील,स्पष्ट भाषी,बुद्धिमान,अविवाहित माँ की संतान होता है।
तृतीय चरण : इसका स्वामी शुक्र है।नवमांश तुला। जातक श्याम वर्ण, असित नेत्र, दूसरे की स्त्री के साथ विश्वास घाती, भ्रमण शील, धैर्यवान, नट, साहसी होता है।जातक सामाजिक, बहु मित्र वाला, अच्छा ज्योतिषी होता है।जातक का खोजी दिमाग पूरी तरह ज्योतिष की ओर निर्देशित होता है।वह अच्छा ज्योतिषी या अंक ज्योतिषी बन जाता है।
चतुर्थ चरण : इसका स्वामी मंगल है। नवमांश वृश्चिक। यह संघर्ष, उत्तेजना, कामातुर, गोपनीयता, संस्कारिता का द्योतक है। जातक गंभीर लाल नेत्र, चपटी नाक, सुदृढ़ अंग, अच्छी पाचन शक्ति वाला, बड़ा पेट, उग्र कर्म करने वाला होता है।जातक चरम पंथी अर्थात चरम सीमा तक कार्य करने वाला, ये अपने लक्ष्यो के साथ पारिवारिक जीवन के साथ पाने मे असफल होते है।