
शतभिषा
🌟 राशि: कुंभ
🌟 नक्षत्र देवता: वरुण
🌟 नक्षत्र स्वामी: राहु
शतभिषा नक्षत्र में जन्मा जातक बहुत साहसी एवं मजबूत विचारों वाला होता है। शारीरिक श्रम न करके हर समय अपनी बुद्धि का परिचय देते हैं। इस नक्षत्र में जन्में लोग स्वच्छंद विचारधारा के होते है अत: साझेदारी की अपेक्षा स्वतंत्र रूप से कार्य करना पसंद करते हैं। ये लोग अत्यधिक सामर्थ्य, स्थिर बुद्धि और उन्मुक्त विचारधारा के होते हैं और मशीनी तौर पर जीना इन्हें कतई बरदाश्त नहीं होता। ये अपने शत्रुओं पर हमेशा हावी रहते हैं। समृद्धशाली होने के कारण अपने आस-पास के लोगों से सम्मान प्राप्त होता है।
शिक्षा और आय
आप ऊँची-से-ऊँची शिक्षा प्राप्त करने के योग्य हैं। मनोविज्ञान व स्पर्श-चिकित्सा के क्षेत्र में आप दक्षता प्राप्त कर सकते हैं। ज्योतिष शास्त्र के प्रति भी आपकी गहन रुचि है और आप एक अच्छे व सुलझे हुए विद्वान ज्योतिषी भी बन सकते हैं। आपमें चिकित्सा के क्षेत्र में नाम कमाने की भी क्षमता है। आप इलेक्ट्रीशियन, कीमोथेरेपी चिकित्सक, अंतरिक्ष यात्री, अंतरिक्ष वैज्ञानिक या ज्योतिषी, पायलेट, सैन्य कला प्रशिक्षक, फ़िल्म व दूरदर्शन से जुड़े कार्य, फ़िल्म अभिनेता व कलाकार, मॉडल, फ़ोटोग्राफ़र, विज्ञान के शिक्षक या लेखक, परमाणु भौतिकी से जुड़े क्षेत्र, औषधि निर्माण से जुड़े कार्य, वैद्य या शल्य चिकित्सक, मदिरा निर्माण या मादक पदार्थों से जुड़े कार्य, प्लास्टिक या प्लास्टिक निर्माण से जुड़े कार्य, पेट्रोलियम से जुड़े कार्य, योग शिक्षक, आविष्कारकर्ता आदि कार्य करके सफल जीवन जी सकते हैं।
पारिवारिक जीवन
संभव है कि आपको प्रियजनों से काफ़ी समस्याओं का सामना करना पड़े। अपनी उदारता के कारण आप बिना मांगे सबकी सहायता करने को तत्पर रहते हैं परंतु स्वयं आपको मानसिक परेशानियों से गुज़रना पड़ता है। विशेषतः भाईयों से आपका मनमुटाव हो सकता है। माता-पिता से आपको पूर्ण स्नेह प्राप्त होगा। आपका वैवाहिक जीवन संतुष्टिपूर्ण रहेगा क्योंकि आप अपने जीवनसाथी से निःस्वार्थ प्रेम करेंगे। आपके जीवनसाथी को उदारता की प्रतिमूर्ति कहा जा सकता है वे परिवार का पूरा ख़्याल रखेंगे और बड़ों का भी ख़ूब सम्मान करेंगे। वे नेकी कर और दरिया में डाल वाली उक्ति पर चलकर जीवन जिएंगे।
प्रथम चरण : इस चरण का बृहस्पति हैं। शतभिषा नक्षत्र के पहले चरण में जन्मा जातिक कुशल वक्ता होता है। शतभिषा नक्षत्र के पहले चरण का बृहस्पति शनि का शत्रु है और राहु का भी। अती बृहस्पति की दशा अपेक्षित फल नहीं देगी। बृहस्पति में राहु व् शनि का अंतर कष्टदायी होगा। राहु की दशा उत्तम फल देगी ।
द्वितीय चरण : इसका स्वामी शनि है। इसमे शनि, राहु, शनि का प्रभाव है। नवमांश मकर। यह आयोजन, प्रयोगिक, इच्छाओ का द्योतक है। जातक गौर वर्ण, बड़ा मुख, स्त्रियो मे अनुरक्त, धीर, वीर, गंभीर, शत्रुहंता, भोग विलास मे रत होता है।इस पाद मे जातक व्यावसायिक विकास मे ध्यान रखने वाला, कर्मठ और अपने विकास के लिए महत्वाकांक्षी, परिवार को अधिक समय नही देने वाला अच्छा अभिभावक होता है ।
तृतीय चरण : इस चरण का सहारा है। शतबीषा नक्षत्र के तीसरे चरण में जन्मा जातिक अपने समाज में सुखी और संपन्न व्यक्ति होता है। शतबीषा नक्षत्र के तीसरे चरण का घर भी जाना जाता है अती शनि की दशा शुभ फल देगी। राहु की स्वतंत्र दशा उत्तम फल देगी, परन्तु राहु में शनि या शनि में राहु की अन्तर्दशा शत्रु तुल्य कष्ट देगी। शतभिषा नक्षत्र के तीसरे चरण का स्वामी शनि लग्नेश भी है शनि की दशा शुभ फल देगी राहु की स्वतंत्र दशा उत्तम फल देगी, परन्तु राहु में शनि या शनि में राहु की अन्तर्दशा शत्रु तुल्य कष्ट देगी।
चतुर्थ चरण : इसका स्वामी गुरु है। इसमे शनि, राहु, गुरु का प्रभाव है। नवमांश मीन। यह भ्रम, खर्च, दया, पवित्रता का द्योतक है। जातक व्याघ्र मुखी, घुंघराले बाल वाला, साहसी, निश्चित अर्थ का ज्ञाता, हिंसक जन्तुओ को मारने वाला, राज्य प्रिय होता है।इस पाद मे जातक सम्पदा और परिवार का प्रदर्शनकारी, व्यवसाय के कारण परिवार से दूर रहने वाला, भावुक, काल्पनिक, शराब के नशे का आदी और नशे के लिए घर का त्याग करने वाला लेकिन शराब की लत वाला, आध्यात्मिक गुरु या डाक्टर होता है।