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पूर्वाभाद्रपद

पूर्वाभाद्रपद


पूर्वाभाद्रपद

🌟 राशि: कुंभ,मीन

🌟 नक्षत्र देवता: अजैक चरण

🌟 नक्षत्र स्वामी: गुरू

गुरु ग्रह के स्वामित्व वाले इस नक्षत्र में जन्में जातक सत्य और नैतिक नियमों का पालन करने वाले होते हैं। साहसी, दूसरों की मदद करने वाले, मिलनसार, मानवता में विश्वास रखने वाले, व्यवहार कुशल, दयालु और नेक दिल होने के साथ-साथ खुले विचारों वाले होते हैं। ये लोग आध्यात्मिक प्रवृत्ति के साथ-साथ ज्योतिष के भी अच्छे जानकार कहे जाते हैं। ये लोग अपने आदर्शो और सिद्धांतों पर ही आजीवन चलना पसंद करते हैं।

शिक्षा और आय

आप जन्मजात बुद्धिमान हैं और किसी भी क्षेत्र में सफलता अर्जित कर सकते हैं। अगर आप सरकारी नौकरी में हैं तो सरकार से अप्रत्याशित रूप से लाभ व पदोन्नति प्राप्त करेंगे। आर्थिक और सामाजिक रूप से आप स्वतंत्र जीवन जीने में सक्षम हैं। 24 वर्ष से लेकर 33 वर्ष तक आपके जीवन में विशेष विशिष्ट उन्नति का समय रहेगा। आप शल्य चिकित्सक, रोमांच कथा लेखक, पुरोहित, ज्योतिषी, योग शिक्षक, मनोविश्लेषक, राजनेता, हथियारों के निर्माण से जुड़े कार्य, सैनिक, इन्कॉउंटर स्पेशलिस्ट, वैल्डिंग, लोहार या सुनार से जुड़े कार्य, औषधि निर्माण से जुड़े कार्य आदि करके सफल जीवन जी सकते हैं।

पारिवारिक जीवन

संभावना है कि आपको माता का स्नेह अपेक्षाकृत कम प्राप्त हो। इसका एक कारण माता से अलगाव भी हो सकता है। मगर आपका वैवाहिक जीवन सुखी बीतेगा। पत्नी समझदार व कर्तव्यपरायण होगी। बच्चों से भी आपको पूर्ण सुख प्राप्त होगा।

प्रथम चरण : इस चरण का स्वामी मंगल हैं। पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के प्रथम चरण में जन्मा जातक शूरवीर होता है, तथा जो वस्तु विनम्रता , प्रार्थना व् खरीद से प्राप्त नहीं हो पाती उसे हरण करने में रूचि रखता है पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र का स्वामी बृहस्पति शनि का शत्रु है परन्तु मंगल का मित्र । मंगल की दशा शुभ फल एवं भौतिक सम्पन्नता देगी परन्तु बृहस्पति की दशा में अपेक्षित शुभ फल नहीं मिल पाएंगे। शनि की दशा अन्तर्दशा शुभ फल देगी।

द्वितीय चरण : इसका स्वामी शुक्र है। इसमे शनि, गुरु, शुक्र का प्रभाव है। नवमांश वृषभ। यह संतोष स्पष्टता का द्योतक है। जातक स्थिर सत्व बुद्धि वाला, राजा का प्रेमी, सैन्याधिकारी, सुभग, मैत्री पूर्ण स्वभाव वाला, स्नेहशील, मोटे दांत, बड़े नेत्र वाला होता है। इस पाद मे जातक रहस्य, काला जादू मे रुचिवान, पथ भ्रष्ट होने वाला होता है। यदि जातक रहस्यवादी हो, तो अच्छा ज्योतिषी और कला जादूगर हो सकता है।

तृतीय चरण : इस चरण का स्वामी चन्द्रमा हैं. पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के चौथे चरण में जन्मा जातक भोगी होता है। लग्न नक्षत्र स्वामी और नक्षत्र चरण स्वामी में परस्पर मित्रता है लग्नेश गुरु की दशा अति उत्तम फल देगी. गुरु की दशा में जातक को रोजगार के शुभ अवसर प्राप्त होंगे। चन्द्रमा की दशा धार्मिक यात्राएं एवं भाग्योदय के उत्तम अवसर प्रदान करेंगी। लग्न बलि न होने के कारण जातक के विकास में अडचने आएँगी।

चतुर्थ चरण : इसका स्वामी चन्द्र है। इसमे शनि, गुरु, चन्द्र का प्रभाव है। नवमांश कर्क। यह जादू की विद्या, सीमान्त परोपकारिता, तोड़फोड़, सामाजिकता का द्योतक है। जातक रक्त गौर वर्ण, छोटा गाल, पतली कमर, बुद्धिमान, चंचल चित्त, उत्साही, आशावादी, कोमलांगी पत्नी वाला होता है। इस पाद मे जातक वाह्य वातावरण मे संवेदनशील, परस्थितियो से विपरीत रहने वाला होता है। इनकी ऊर्जा को नकारात्मक के बजाय सकारात्मक मार्ग पर ले जाने की आवश्यकता होती है।