
उत्तराभाद्रपद
🌟 राशि: कुंभ,मीन
🌟 नक्षत्र देवता: अहिर्बुंधन्य
🌟 नक्षत्र स्वामी: शनि
इस नक्षत्र में जन्में लोग हवाई किलों या कल्पना की दुनिया में विश्वास नहीं करते। ये लोग बेहद यथार्थवादी और हकीकत को समझने वाले होते हैं। व्यापार हो या नौकरी, इनका परिश्रम इन्हें हर जगह सफलता दिलवाता है। त्याग भावना, स्वभाव से एक दयालु धार्मिक होने के साथ-साथ वैरागी भी होते हैं। समाज में एक धार्मिक नेता, प्रसिद्द शास्त्र विद एवं मानव प्रेमी के रूप में प्रख्यात होते है। कोमल हृदयी हैं एवं दूसरों के साथ सदैव सद्भावना के साथ-साथ दुर्व्यवहार करने वाले को क्षमा और दिल में किसी के प्रति कोई द्वेष नहीं रखते।
शिक्षा और आय
आपकी शिक्षा अच्छी रहेगी और अनेक विषयों का भी आपको ज्ञान होगा। आप ध्यान व योग विशेषज्ञ, रोग निदान व चिकित्सा विशेषज्ञ, सलाहकार, आध्यात्मिक गुरु, तपस्वी, योगी, दिव्य पुरुष, दान संस्था से जुड़े कार्य, शोधकर्ता, दार्शनिक, कवि, लेखक, संगीतज्ञ, कलाकार, दुकानदार, सरकारी कर्मचारी, इतिहासकार, सुरक्षाकर्मी आदि कार्य करके सफल हो सकते हैं।
पारिवारिक जीवन
आप अपनी जन्मभूमि से दूर रहकर जीवनयापन करेंगे। संभव है कि पिता से आपको ज़्यादा लाभ प्राप्त न हो और आपको बचपन में कुछ उपेक्षा महसूस हो। आपका वैवाहिक जीवन ख़ुशियों से भरा होगा। आपका जीवनसाथी अत्यंत योग्य होगा व आपकी संतान ही आपकी असली पूंजी होगी। विवाह के बाद आपका असली भाग्योदय होगा। आपकी संतान आज्ञाकारी, समझदार व बड़ों का आदर करने वाली होगी।
प्रथम चरण : इसका स्वामी सूर्य है। नवमांश सिंह। यह निश्चितता, अहंकार, इच्छा का द्योतक है। यह मोटी चौड़ी भोंहे व नाक वाला, सुन्दर देह, क्रियापटु, जंगल विचरणी, धार्मिक कार्यो में निपुण, माँसाहारी होता है। इस पाद का जातक कर्मठ, ज्ञानी, समाज मे प्रतिष्ठित, विरोधी इसके विचारो मे असहमत किन्तु यह उनको झुकाने वाला, गुपचुप मांसाहारी होता है।
द्वितीय चरण : इसका स्वामी बुध है। नवमांश कन्या। यह संचार, गणना, योजना का द्योतक है। जातक गौर वर्ण, सुन्दर नेत्र, सुन्दर आकर्षक देह, धैर्यवान, विद्वान, नम्र, कृपालु, विनीत होता है।इस पाद में जातक अध्यनरत, जीवन और उद्द्येश्यो का परिकलन करने वाला, बुद्धि पर विवेकी, थोड़ा अन्तर्मुखी, विपरीत लिंग के विकास हेतु विचार विमर्श करने वाला होता है।
तृतीय चरण : इसका स्वामी शुक्र है। नवमांश तुला। यह संतुलन, लक्ष्य. सकारात्मकता का द्योतक है। जातक गुणवान, विपत्तिशील, सहायता सेवा करने वाला, धार्मिक कार्य में निपुण, विद्वान, साहसी, निपुण, ऊँची नाक वाला होता है।जातक शोध से जुड़ा हुआ, ज्योतिष और उसकी शखाओ मे रुचिवान, आध्यात्मिक प्रमुख, आध्यात्मिक शोध से संबद्ध, अाध्यात्म के लिए परिवार बलिदानी, जीवन मे विरोध और बाधाओ का सामना करने वाला, वरिष्ठो से सहयता प्राप्त होता है।
चतुर्थ चरण : इसका स्वामी मंगल है। नवमांश वृश्चिक। यह जादूगरी, ऊर्जा या रहस्य का द्योतक है। जातक लम्बा, काला, ऊँचे अंग, छोटी नाक, प्रतापी, हिंसा पूर्ण या आध्यात्मिक कामो मे सलग्न, असह्य होता है। जातक रहस्य विज्ञान से सम्बन्धित होता है। आध्यात्म ज्ञान को उजागर करने वाला होता है। इस चरण के जातक को प्रकृति या ईश्वर का रहस्य उजागर करने का खतरा होता है, जिसके लिए इस जन्म या अगले जन्म में सजा भुगतनी पड़ती है। यह अन्य चरणो के जातक से भिन्न होता है।