Bharani

भरणी

Bharani

2nd lunar mansion of Hindu astrology

भरणी नक्षत्र: एक विस्तृत विवरण

भरणी (Devanagari: भरणी) हिन्दू ज्योतिषशास्त्र में दूसरा नक्षत्र है, जो मेष राशि के 35, 39 और 41 Arietis तारों से मिलकर बना है। ज्योतिष में, भरणी का स्वामी शुक्र (Venus) ग्रह है।

प्रकृति: भरणी को एक क्रूर या सक्रिय नक्षत्र के रूप में वर्गीकृत किया गया है। इसका अर्थ है कि, मुहूर्त ज्योतिष के अनुसार, हानिकारक या भ्रामक प्रकृति के कार्यों को उस समय करना सबसे अच्छा माना जाता है जब चंद्रमा भरणी नक्षत्र में हो।

स्वामी: भरणी नक्षत्र को यमराज, मृत्यु के देवता, या काली के अधीन माना जाता है।

नामकरण: परंपरागत हिंदू नामकरण पद्धति में, जन्म के समय लग्न/लग्न राशि किस नक्षत्र के किस चरण (pada) में स्थित थी, इस आधार पर नाम का पहला अक्षर निर्धारित किया जाता है। भरणी नक्षत्र के चारों चरणों के लिए नाम के प्रारंभिक अक्षर इस प्रकार होंगे:

  • अ (उच्चारण "अनुवाद" की तरह)
  • ई (उच्चारण "ईमानदार" की तरह)
  • ली (उच्चारण "लीची" की तरह)
  • लू (उच्चारण "लूटना" की तरह)
  • ले (उच्चारण "लेकिन" की तरह)
  • लो (उच्चारण "लोहा" की तरह)

विस्तार: भरणी नक्षत्र का संबंध मृत्यु और पुनर्जन्म से है। यह नक्षत्र परिवर्तन, परिवर्तन और नई शुरुआत का प्रतीक है। यहां जन्म लेने वाले व्यक्ति साहसी, दृढ़ निश्चयी और स्वतंत्र होते हैं। वे जीवन में कई चुनौतियों का सामना करते हैं, लेकिन अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से सफलता प्राप्त करते हैं।


Bharani is the second nakshatra in Hindu astronomy, corresponding to 35, 39, and 41 Arietis all together. In Jyotiṣa, Bharani is ruled by Shukra . Also, it is classified as a Cruel or Active nakshatra, meaning that, under electional astrological beliefs, works of a harmful or deceptive nature are best conducted while the moon is Bharani.