Kshullak

क्षुल्लक

Kshullak

Junior Digambar Jain monk

क्षुल्लक: दिगंबर जैन परंपरा में एक महत्वपूर्ण पद

हिंदी में विस्तृत विवरण:

"क्षुल्लक" शब्द का अर्थ है "छोटा" या "कनिष्ठ"। दिगंबर जैन परंपरा में, क्षुल्लक एक कनिष्ठ जैन साधु को कहा जाता है। क्षुल्लक दो वस्त्र धारण करते हैं, जबकि पूर्ण साधु कोई वस्त्र नहीं धारण करते।

क्षुल्लक वास्तव में क्या है?

क्षुल्लक, श्रावक की उच्चतम उपाधि (११ वीं प्रतिमा) धारण करने वाला व्यक्ति होता है। यह एक पूर्ण मुनि बनने से सिर्फ एक कदम पीछे होता है। क्षुल्लक के आचरण का वर्णन "वसुनंदी श्रावकाचार" और "लति संहिता" में मिलता है।

क्षुल्लक और ऐलक में अंतर:

११ वीं प्रतिमा प्राप्त करने वाला श्रावक या तो क्षुल्लक बनता है या ऐलक। क्षुल्लक एक लंगोटी (कौपीन) और एक सफेद आयताकार वस्त्र धारण करता है, जबकि ऐलक केवल लंगोटी धारण करता है।

क्षुल्लक का जीवन:

  • क्षुल्लक घर में रह सकता है या भ्रमणशील हो सकता है।
  • वह केवल एक बार भोजन ग्रहण करता है, वह भी या तो अपनी हथेलियों में या किसी पात्र में रखकर।
  • वह एक घर से या अनेक घरों से भिक्षा मांग सकता है।
  • वह यज्ञोपवीत और शिखा धारण कर सकता है।

प्रसिद्ध क्षुल्लक:

  • क्षुल्लक गणेशप्रसाद वर्णी
  • क्षुल्लक जिनेन्द्र वर्णी

जैन परंपरा में नारद मुनि:

जैन परंपरा में, नारद मुनि को एक क्षुल्लक जैन साधु माना जाता है।

कोल्हापुर और क्षुल्लक:

महाराष्ट्र का कोल्हापुर शहर पहले "क्षुल्लकपुर" के नाम से जाना जाता था क्योंकि शिलाहार शासन के दौरान यहाँ बहुत से जैन साधु निवास करते थे।


A kshullak is a junior Digambar Jain monk. A kshullak wears two garments as opposed to a full monk who wears no clothes. Specifically a Kshullaka is a Shravaka of the highest degree at 11th Pratima.