Vidyaranya
Guru

विद्यारण्य

Vidyaranya

Indian author and guru (1296–1391)

0Followers
0Prayers
5Photos
0Posts

यह विकिपीडिया कंटेंट खाली है। विस्तृत जानकारी के लिए यहां एक संस्करण दिया गया है, जिसमें हिंदी में अधिक जानकारी है:

विद्यारण्य: एक महान दार्शनिक और राजनीतिक मार्गदर्शक

विद्यारण्य (संस्कृत: विद्यारण्य), जिन्हें प्रायः माधवाचार्य के नाम से भी जाना जाता है, श्रृंगेरी शारदा पीठ के जगद्गुरु थे। माना जाता है कि उन्होंने लगभग 1374-1380 से 1386 तक इस पद को सुशोभित किया। परंपरा के अनुसार, वृद्धावस्था में दीक्षा लेने के बाद, उन्होंने विद्यारण्य नाम धारण किया और श्रृंगेरी मठ के जगद्गुरु बने।

माधवाचार्य को सर्वदर्शनसंग्रह के रचयिता के रूप में जाना जाता है, जो विभिन्न हिंदू दर्शन शाखाओं का एक संग्रह है। उन्होंने पंचदशी नामक ग्रंथ भी लिखा, जो अद्वैत वेदांत के लिए एक महत्वपूर्ण रचना मानी जाती है।

मान्यता है कि विद्यारण्य ने 1336 में विजयनगर साम्राज्य की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। कहा जाता है कि वे इस साम्राज्य के तीन पीढ़ियों के राजाओं के मार्गदर्शक और गुरु थे। हालांकि, इस घटना के ऐतिहासिक सत्यता पर संदेह है। कुछ इतिहासकारों का मानना ​​है कि यह कथा घटना के लगभग 200 साल बाद सामने आई होगी, जो विजयनगर साम्राज्य की सत्ता को सल्तनत से जोड़ने का एक राजनीतिक प्रयास हो सकता है।

श्रृंगेरी में स्थित विद्याशंकर मंदिर, विद्यारण्य के गुरु आदि शंकराचार्य का समाधि स्थल है। इस मंदिर का निर्माण उनके शिष्य हरिहर ने उनकी समाधि पर करवाया था। वर्तमान में इस मंदिर का रखरखाव भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा किया जाता है।

संक्षेप में, विद्यारण्य एक महान दार्शनिक, विद्वान और राजनीतिक मार्गदर्शक थे जिन्होंने भारतीय इतिहास और दर्शन पर अपनी अमिट छाप छोड़ी।


Vidyaranya, usually identified with Mādhavācārya, was the jagadguru of the Sringeri Sharada Peetham from ca. 1374–1380 until 1386 - according to tradition, after ordination at an old age, he took the name of Vidyaranya, and became the Jagadguru of this Matha at Sringeri.