Swami Satyamitranand
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स्वामी सत्यमित्रानंद

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स्वामी सत्यमित्रानन्द गिरी: एक संक्षिप्त जीवन परिचय

स्वामी सत्यमित्रानन्द गिरी (१९ सितम्बर १९३२ – २५ जून २०१९), जिन्हें आम तौर पर स्वामी सतमीत्रानन्द के नाम से जाना जाता था, एक प्रसिद्ध हिन्दू आध्यात्मिक गुरु थे। उनका जन्म १९ सितम्बर १९३२ को आगरा, उत्तर प्रदेश, भारत में अम्बिका प्रसाद के रूप में हुआ था। उन्हें ज्योतिर्मठ के एक उपपीठ का जगद्गुरु शंकराचार्य घोषित किया गया था। वे हरिद्वार में स्थित भारत माता मन्दिर के संस्थापक भी थे, जो एक विशाल और प्रसिद्ध मन्दिर है। उन्होंने १९८८ में समन्वय सेवा फाउंडेशन की भी स्थापना की थी।

यह फाउंडेशन समाज सेवा के विभिन्न पहलुओं में कार्य करता है, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। स्वामीजी ने अपने जीवनकाल में अनेक सामाजिक और धार्मिक कार्य किये, जिससे समाज के विभिन्न वर्गों को लाभ हुआ। उनका जोर सदैव धर्म और आध्यात्म के माध्यम से मानवता की सेवा पर रहा।

जून १९६९ में, स्वामीजी ने जगद्गुरु शंकराचार्य का पद त्याग दिया। यह निर्णय उनके आध्यात्मिक दर्शन और जीवन के प्रति दृष्टिकोण को दर्शाता है। उन्होंने सन्यास जीवन को केवल पदों और प्रतिष्ठा से परे, आध्यात्मिक विकास और समाज सेवा के लिए समर्पित किया।

भारत सरकार ने वर्ष २०१५ में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया था। यह पुरस्कार उनके आध्यात्मिक योगदान और समाज सेवा के प्रति समर्पण को मान्यता देता है। उनका जीवन एक आदर्श उदाहरण है, जो सन्यासी जीवन को सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ जोड़ता है। उनकी शिक्षाएँ और कार्य आज भी अनेक लोगों को प्रेरणा देते हैं।


Swami Satyamitranand, usually known as Swami Satmitranand Giri was a Hindu spiritual guru. He was born on 19 September 1932 in the city of Agra, Uttar Pradesh, India, as Ambika Prasad. He was crowned the Jagatguru Shankaracharya of an Upapeeth of Jyotir Math. He was the founder of Bharat Mata Mandir, a temple in Haridwar. He founded Samanvaya Seva Foundation in 1988.