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भारती कृष्ण तीर्थ

Bharati Krishna Tirtha

Indian mathematician (1884–1960)

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जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी भारतीकृष्ण तीर्थ जी

सरस्वती पी. वेंकटरमन शास्त्री (IAST: P. Veṅkatarāmaṇ Śāstrī), जिन्हें सम्मानपूर्वक जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी भारतीकृष्ण तीर्थ (IAST: Jagadguru Śaṅkarācārya Svāmī Bhāratīkṛṣṇa Tīrtha) के नाम से जाना जाता था (१८८४-१९६०), द्वारका पीठ के शंकराचार्य और प्रमुख पीठाधीश्वर थे, और बाद में १९२५ से १९६० तक ओडिशा राज्य के पुरी स्थित गोवर्धन मठ के १४३वें शंकराचार्य और सर्वोच्च पीठाधीश्वर रहे। वे अपनी पुस्तक "वेदिक गणित" के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं। वे इतिहास में पश्चिम का दौरा करने वाले पहले शंकराचार्य थे और राष्ट्रवादी आकांक्षाओं से जुड़े होने के कारण उन्हें 'वेदिक गणित के जनक' का खिताब भी मिला।

विस्तृत विवरण:

  • जन्म और शिक्षा: १८८४ में जन्मे स्वामी भारतीकृष्ण तीर्थ ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की और वेदों, उपनिषदों, ब्रह्मसूत्रों और अन्य शास्त्रों में पारंगत हुए। उनकी गहन अध्ययनशीलता और तीव्र बुद्धिमत्ता उन्हें एक प्रतिभाशाली विद्वान के रूप में स्थापित करती है।

  • द्वारका और गोवर्धन पीठ: वे पहले द्वारका पीठ के शंकराचार्य बने और बाद में गोवर्धन पीठ के पीठाधीश्वर के रूप में नियुक्त हुए। इन दोनों महत्वपूर्ण पीठों पर उनके कार्यकाल ने आध्यात्मिक और सामाजिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

  • वेदिक गणित: उनकी सबसे महत्वपूर्ण देन है "वेदिक गणित" नामक पुस्तक। इस पुस्तक में उन्होंने प्राचीन भारतीय गणितीय प्रणालियों को सरल और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया है। यह पुस्तक गणित के क्षेत्र में एक क्रांति लाने वाली साबित हुई है और आज भी दुनिया भर में इसका अध्ययन किया जाता है।

  • पश्चिम की यात्रा: वे पश्चिम की यात्रा करने वाले पहले शंकराचार्य थे। इस यात्रा ने भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

  • राष्ट्रवादी विचारधारा: स्वामी भारतीकृष्ण तीर्थ राष्ट्रवादी विचारधारा से जुड़े थे और उन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए योगदान दिया। उनके विचारों और कार्यों ने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को बल प्रदान किया।

संक्षेप में, स्वामी भारतीकृष्ण तीर्थ एक महान आध्यात्मिक गुरु, विद्वान, गणितज्ञ और राष्ट्रवादी थे, जिन्होंने अपने जीवनकाल में अनेक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका जीवन और कार्य आज भी लाखों लोगों को प्रेरणा देता है।


Saraswati P. Venkataraman Sastri , hieratically titled H.H. Jagadguru Shankaracharya Swami Bharatikrishna Tirtha (1884–1960), was Shankaracharya and officiating pontiff of Dwaraka Math, and then the 143rd Shankaracharya and supreme pontiff of Govardhana Math in Puri in the Indian state of Odisha, from 1925 through 1960. He is particularly known for his book Vedic Mathematics, being the first Sankaracarya in history to visit the West, and for his connection with nationalist aspirations, thus earning him the title 'Father Of The Vedic Maths'.