उपधान

Upadhan

Religious practices performed by Śrāvakas in Jainism

उपधान - जैन धर्म में श्रावकों के लिए पवित्र अनुष्ठान

जैन धर्म में, उपधान श्रावकों द्वारा किए जाने वाले धार्मिक अनुष्ठान हैं। ये अनुष्ठान एक आदर्श जैन साधु के जीवन शैली की नकल करते हैं, और पौषध व्रत के दौरान किए जाते हैं। पौषध व्रत में पूरे दिन किसी भी जीव को नुकसान न पहुंचाने का व्रत शामिल होता है।

उपधान तीन भागों में किया जाता है, जो 47 दिन, 35 दिन और 28 दिन तक चलते हैं। हर दूसरे दिन उपवास किया जाता है, और दूसरे दिन एक स्थान पर एक बार भोजन किया जाता है, जिसे एकसन या निवि कहा जाता है।

47 दिन के उपधान के तीन भाग होते हैं:

  1. प्रथम अधारियु (18 दिन): इस भाग में 18 दिन तक उपवास और एकसन का अनुष्ठान किया जाता है।
  2. द्वितीय अधारियु (18 दिन): इस भाग में भी 18 दिन तक उपवास और एकसन का अनुष्ठान किया जाता है।
  3. चकिया-चौकिया (11 दिन): इस भाग में 11 दिन तक उपवास और एकसन का अनुष्ठान किया जाता है।

35 दिन का उपधान "पत्रिश्या" और 28 दिन का उपधान "अठाविश्यु" कहलाता है।

उपधान के दौरान हर दिन निम्नलिखित अनुष्ठान करने होते हैं:

  • नमोकार मंत्र का 20 बार जाप: यह मंत्र जैन धर्म का सबसे महत्वपूर्ण मंत्र है।
  • 100 खमासमन: खमासमन एक प्रकार का प्रणाम है जिसमें सिर जमीन को छूता है।
  • कायोट्सर्ग: यह ध्यान की अवस्था है जिसमें लोगास सूत्र का 100 बार जाप किया जाता है।
  • पौषध व्रत: यह व्रत एक आदर्श जैन साधु के जीवन शैली को दर्शाता है।

इनके अलावा, श्रावकों को कुछ जैन आगमों का अध्ययन भी करना होता है। उपधान एक कठोर और लंबा अनुष्ठान है।

श्रावकों को अपने जीवन को शुद्ध और पूर्ण करने के लिए एक विशेष अनुष्ठान "प्रतिमा" भी करना होता है। जैन आगम शास्त्रों में 11 प्रकार की प्रतिमाओं का उल्लेख है:

  1. सम्यक्त्व: सही विश्वास
  2. व्रत: नियम
  3. समयिक: ध्यान
  4. पौषध: व्रत
  5. नियम: नियम
  6. ब्रह्मचर्य: ब्रह्मचर्य
  7. सचित्त त्याग: मन से त्याग
  8. उद्दिष्ट: उद्देश्य
  9. प्रेष्यारंभ त्याग: दूसरों द्वारा प्रेरित कार्यों का त्याग
  10. आरंभ त्याग: स्वयं द्वारा प्रेरित कार्यों का त्याग
  11. श्रमणभूत: साधुता

ये प्रतिमाएँ एक निश्चित समय के लिए ली जाती हैं, जो नियमों के अनुसार हो सकता है।

उपधान एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है जो श्रावकों को आध्यात्मिक प्रगति के मार्ग पर चलने में मदद करता है।


Upadhāna are the religious practices performed by Śrāvakas in Jainism.